Who Pocketed What in the NEET Leak The Mastermind Worth Crores the Solver Worth Lakhs करोड़ों का मास्टरमाइंड, लाखों का सॉल्वर: NEET लीक वाले अपराधियों ने कितना कमाया होगा, India News in Hindi - Hindustan
More

करोड़ों का मास्टरमाइंड, लाखों का सॉल्वर: NEET लीक वाले अपराधियों ने कितना कमाया होगा

NEET UG पेपर लीक मामले में पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि प्रश्नपत्र की एक प्रति को कथित रूप से नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस से लीक करके गुरुग्राम के एक डॉक्टर तक पहुंचाया गया था। हालांकि,उन्होंने कहा कि मामला अभी जांच के अधीन है।

Wed, 13 May 2026 11:29 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
share
करोड़ों का मास्टरमाइंड, लाखों का सॉल्वर: NEET लीक वाले अपराधियों ने कितना कमाया होगा

NEET UG 2026, मेहनत करने वाले छात्रों के लिए भविष्य बनाने का मौका और अपराधियों के लिए मोटा मुनाफा कमाने का जरिया। अगर मोटा अनुमान ही लगाया जाए, तो पढ़ाई करने वाले करोड़ों छात्रों के भविष्य की बोली ये अपराधी 100 करोड़ रुपये से ज्यादा में लगा देते हैं। इतना ही नहीं करोड़ों रुपये की कमाई सिर्फ एक रात में ही कर देते हैं। मासूम छात्रों के भविष्य पर टिका यह काला धंधा सिर्फ किसी एक शख्स या गैंग का नहीं होता, बल्कि इसमें कई स्तर पर लोग शामिल होते हैं जो अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं।

पहले समझें कैसे काम करता है पेपर लीक का धंधा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें तीन स्तर होते हैं। सबसे पहले आते हैं सॉल्वर गैंग का लीडर या ऐसा कोई व्यक्ति, जिसकी पहुंच प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट या ट्रेजरी से हो। दूसरे नंबर पर आते हैं क्षेत्रीय बिचौलिए, जो कोटा, सीकर या पटना जैसे स्थानों पर छोटे कोचिंग सेंटर्स या होस्टल मैनेजर का चोगा ओढ़कर काम करते हैं।

तीसरे स्थान पर स्थानीय एजेंट और सॉल्वर्स आते हैं, जो इन प्रश्नों को उत्तर के साथ आगे बढ़ाते हैं। इसके बाद ब्रोकर सक्रिय होते हैं, जो परीक्षा से कुछ समय पहले ही अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स की मदद से ज्यादा से ज्यादा पेपर बेचने में लग जाते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:'10 रुपये के डायपर लीक नहीं होते, लेकिन पेपर लीक हो गया', NEET परीक्षा पर खान सर

अब विस्तार से समझते हैं

पहला स्तर- सॉल्वर गैंग या प्राथमिक सोर्स के लिए लीक पेपर बड़ी कीमती चीज होता है। ये पेपर को सीधे छात्रों तक नहीं पहुंचाते हैं, बल्कि इस काम में जुटे क्षेत्रीय दलालों को थोक में बेचते हैं। जांचकर्ताओं का अनुमान है कि प्राइमरी सोर्स ने 180 प्रशनों का सेट 5 से 10 करोड़ रुपये के बीच बेचा होगा। इनका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा थोक में पेपर बेचना। ये अपराधी शेल खातों और क्रिप्टो वॉलेट में लेन देन कर गायब भी हो जाते हैं और इनका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

दूसरा स्तर- यहां अपराधी मास्टर डॉक्युमेंट हासिल करते हैं और इन्हें बेचने की तैयारी करते हैं। माना जाता है कि परीक्षा से दो या तीन दिन पहले ये बिचौलिए बड़े क्लाइंट्स को 15 से 30 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी के हिसाब से पेपर बेचते हैं। खास बात है कि इस फीस में सेफ हाउस का खर्च शामिल होता है, जहां छात्रों को निगरानी के बीच उत्तर याद कराए जाते हैं। ये काम इतनी बारीकी से होता है, ताकि पेपर का कोई भी डिजिटल फुटप्रिंट बाहर न आ सके।

अब इस स्तर पर ये बिचौलिए 50 लाख रुपये में एक कॉपी हासिल कर करीब 500 फीसदी मुनाफा कमा लेते हैं। इतना मुनाफा सिर्फ 10 परिवारों के पेपर बेचकर ही इनकी जेब में पहुंच जाता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बेटे ने भेजा गेस पेपर, पिता ने पकड़ली चोरी; कैसे हुआ NEET पेपर लीक का खुलासा

तीसरा स्तर- लोकल एजेंट और पेपर हल करने वालों की गैंग यहां सक्रिय हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आमतौर पर इनमें पढ़ाई में होशियार एमबीबीएस छात्रों या रिसर्च स्कॉलर्स को लिया जाता है। पेपर सॉल्व करने वाले इन लोगों को हर सेशन के 2 से 5 लाख रुपये मिलते हैं। इनका काम मिनटों में पेपर सॉल्व करना है। इसके बाद एजेंट्स इन्हें आगे बढ़ाते हैं।

चौथा स्तर- सबसे नीचे होते हैं ब्रोकर, जिनकी भूमिका डिलीवरी एजेंट्स की होती है।

करोड़ों का पेपर कैसे हजारों का हो जाता है

करोड़ों रुपये से शुरू हुई लीक पेपर की कहानी परीक्षा की एक रात पहले हजारों में आ जाती है। टेलीग्राम चैनलों पर लीक पेपर की कीमत घटकर महज 25,000 से 50,000 रुपये रह जाती है। सबसे नीचे स्तर के खिलाड़ी गेस पेपर के नाम पर इसे सैकड़ों छात्रों को बेच देते हैं, जिसके जरिए एक ही रात में लाखों रुपये कमा लेते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:NEET पर गरमाई सियासत: 2 हफ्ते सच्चाई दबाती रही सरकार, खूब बरसे अशोक गहलोत

कहां तक पहुंची कार्रवाई

पीटीआई भाषा के अनुसार, NEET UG पेपर लीक मामले में पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि प्रश्नपत्र की एक प्रति को कथित रूप से नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस से लीक करके गुरुग्राम के एक डॉक्टर तक पहुंचाया गया था। हालांकि,उन्होंने कहा कि मामला अभी जांच के अधीन है। इस संबंध में पूछे जाने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. राजेश कटारिया ने कहा, 'गुरुग्राम के एक डॉक्टर' की संलिप्तता की खबरें प्रसारित हो रही हैं लेकिन किसी भी जांच एजेंसी ने अब तक स्थानीय चिकित्सा संस्था से आधिकारिक तौर पर संपर्क नहीं किया है।