NEET UG 2026 exam paper lead Khan Sir says CBI should be removed from this case '10 रुपये के डायपर लीक नहीं होते, लेकिन पेपर लीक हो जाते हैं', NEET-UG परीक्षा रद्द होने पर खान सर, India News in Hindi - Hindustan
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'10 रुपये के डायपर लीक नहीं होते, लेकिन पेपर लीक हो जाते हैं', NEET-UG परीक्षा रद्द होने पर खान सर

खान सर ने बताया कि कई बार ऐसे मामलों में खुद छात्रों ने सबसे पहले संदेह जताया, जबकि सरकारी एजेंसियां समय पर पहचान नहीं कर पाईं। उन्होंने 2024 की घटनाओं पर कहा कि पहले भी ऐसी जांचें हुईं लेकिन ठोस नतीजा नहीं निकला।

Wed, 13 May 2026 12:52 AMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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'10 रुपये के डायपर लीक नहीं होते, लेकिन पेपर लीक हो जाते हैं', NEET-UG परीक्षा रद्द होने पर खान सर

NEET-UG 2026 एग्जाम रद्द किए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने इसे रद्द करने का फैसला लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जाने-माने टीचर खान सर ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हाई-स्टेक परीक्षाओं को संभालने में NTA पूरी तरह असफल रही है और इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं। खान सर ने तंज कसते हुए कहा, 'बच्चों के 10 रुपये के डायपर और पैंपर्स पैंपर्स लीक नहीं होते, लेकिन उनके परीक्षा के पेपर लीक हो जाते हैं।'

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खान सर ने एएनआई से बातचीत में कहा, 'NTA के लिए यह सिर्फ एक पेपर होगा, लेकिन छात्रों के लिए उनकी पूरी जिंदगी है। एनटीए को नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी कहा जाना चाहिए, इनकी प्रशासनिक व्यवस्था बेहद खराब है।' उन्होंने CBI जांच पर भी सवाल उठाए और कहा कि अब तक ऐसी जांचों के ठोस नतीजे बहुत कम ही सामने आए हैं। यह सीबीआई के बस की बात नहीं है। CBI तो नोकिया मोबाइल की तरह है, जब था तब था। उनके अनुसार, जांच इतनी लंबी खिंच सकती है कि छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर लेंगे, लेकिन मामला वहीं का वहीं रहेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले में किसी रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज को निगरानी के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए और जांच के लिए एक तय समयसीमा होनी चाहिए।

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'अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका से इनकार नहीं'

खान सर ने यह भी कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं सिस्टम की विफलता को दर्शाती हैं और इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े नेटवर्क और प्रभावशाली लोग इसमें शामिल हो सकते हैं, जो टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से पेपर बेचते हैं। उन्होंने इस तरह की घटनाओं पर सख्त सजा की मांग की और कहा कि दोषियों को मृत्युदंड तक दिया जाना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। एक पेपर लीक हजारों-लाखों छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर देता है।

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'पुरानी जांच से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला'

खान सर ने यह भी बताया कि कई बार ऐसे मामलों में खुद छात्रों ने सबसे पहले संदेह जताया, जबकि सरकारी एजेंसियां समय पर पहचान नहीं कर पाईं। उन्होंने 2024 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी ऐसी जांचें हुई थीं लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और सुप्रीम कोर्ट से भी हस्तक्षेप की अपील की है और जांच की नियमित रिपोर्टिंग की मांग की है, ताकि छात्रों का भरोसा बहाल किया जा सके। उनका कहना है कि अगर परीक्षा प्रणाली की नींव कमजोर हुई तो इसका असर देश के भविष्य पर लंबे समय तक पड़ेगा।