Who is the 20th TMC MP who did not sign List of rebels sparks a stir कौन है TMC का 20वां सांसद, जिसने नहीं किए हस्ताक्षर; बागियों की लिस्ट से मची हलचल, India News in Hindi - Hindustan
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कौन है TMC का 20वां सांसद, जिसने नहीं किए हस्ताक्षर; बागियों की लिस्ट से मची हलचल

लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, जो इस समय बागियों के मुख्य निशाने पर हैं। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास दो मुख्य रास्ते हैं।

Sat, 13 June 2026 08:00 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता।
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कौन है TMC का 20वां सांसद, जिसने नहीं किए हस्ताक्षर; बागियों की लिस्ट से मची हलचल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मची बगावत अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भेजकर संसद में खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता देने और पार्टी सिंबल पर अपना दावा ठोका है। इस चिट्ठी के सामने के बाद 20वें सांसद के बगावत की भी चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, यह पत्र 18 मई का है जिस पर टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। दिलचस्प बात यह है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों के सीरियल नंबर 1 से 20 तक हैं, लेकिन 13वें नंबर के आगे किसी का हस्ताक्षर नहीं है। इससे यह राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी का कोई अन्य कद्दावर सांसद भी इस बागी गुट के संपर्क में है और सही समय पर सामने आ सकता है।

बागी गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "हां, मैंने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और हमने इसे काफी समय पहले ही स्पीकर को भेज दिया था।" वहीं, सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा कि इस पत्र से यह साफ हो जाता है कि लोकसभा में असली टीएमसी हम ही हैं।

इन 19 सांसदों के हस्ताक्षर

शुक्रवार को सामने आई चिट्ठी में जिन सांसदों के हस्ताक्षर हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हालदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंदोपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सयानी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं।

बागी गुट के सामने क्या विकल्प

लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, जो इस समय बागियों के मुख्य निशाने पर हैं। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास दो मुख्य रास्ते हैं। बागी गुट खुद को मूल पार्टी बताकर चुनाव आयोग (EC) के पास जा सकता है। इसके लिए उन्हें विधायी बहुमत साबित करना होगा। दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। 28 सांसदों का दो-तिहाई यानी 19 होता है। यही वजह है कि बागी गुट 19 सांसदों के साथ सुरक्षित होने का दावा कर रहा है।

हाल ही में अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 राज्यसभा सांसदों ने इसी तरह दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा में अपना विलय कर लिया था। यदि टीएमसी के ये 19 सांसद भी भाजपा या एनडीए में सीधे विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता बची रहेगी।

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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पर पलटवार करते हुए एक्स लिखा, "गद्दार टीएमसी सांसदों को कानून नहीं पता। 2003 के 91वें संविधान संशोधन ने पार्टी में विभाजन या अलग ब्लॉक के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती, मूल राजनीतिक दल के 2/3 हिस्से का किसी अन्य दल में विलय होना जरूरी है। इन सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।"

भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, लेकिन वह फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे टीएमसी का आंतरिक विस्फोट और उनके पापों का नतीजा बताया है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने इस हफ्ते दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "हमने टीएमसी को नहीं तोड़ा, वे खुद एनडीए और राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करने के लिए हमारे पास आए हैं। अब यह उन्हें तय करना है कि वे एकनाथ शिंदे या अजीत पवार का रास्ता चुनते हैं या नहीं।"

हालांकि, इस कूटनीतिक बढ़त के बीच बंगाल भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में थोड़ा असंतोष भी है। भाजपा का एक धड़ा इन टीएमसी बागियों को पार्टी में शामिल करने और भविष्य में एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री पद दिए जाने की संभावना का खुलकर विरोध कर रहा है।

केंद्र सरकार को क्या होगा फायदा?

भले ही स्थानीय स्तर पर मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी। लोकसभा में इन 19 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार को परिसीमन विधेयक और 'एक देश, एक चुनाव' जैसे बड़े और कड़े नीतिगत कानूनों को आसानी से पारित कराने में भारी मदद मिलेगी। वहीं राज्यसभा में भी टीएमसी के 3 सांसदों सुखेन्दु शेखर, सुष्मिता देव और प्रकाश बड़ाईक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों को भाजपा विधानसभा में बहुमत के दम पर आसानी से जीत लेगी।