लोकसभा स्पीकर के पास जा रहे TMC के बागी सांसद, NDA का बढ़ेगा कुनबा; EC पर टिकी नजर
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट! बंगाल चुनाव में हार के बाद 19 बागी लोकसभा सांसद स्पीकर ओम बिरला से मिलकर अलग गुट और NDA में शामिल होने की मान्यता मांगेंगे। अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप, पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची भारी उथल-पुथल अब संसद तक पहुंच गई है। टीएमसी के 28 में से 19 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा करते हुए बागी गुट ने अपनी राह अलग करने की पूरी तैयारी कर ली है। ये बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। वे स्पीकर से उन्हें एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने और सदन में सत्ताधारी बीजेपी नीत एनडीए (NDA) के सांसदों के साथ बैठने की अनुमति देने की मांग करेंगे।
'असली टीएमसी' होने का दावा
कूचबिहार से सांसद और बागी गुट के अहम नेता जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि वे स्पीकर से उन्हें 'असली टीएमसी' के तौर पर मान्यता देने का आग्रह करेंगे। बागी गुट चाहता है कि लोकसभा में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को उनका नेता और शताब्दी रॉय को उपनेता के रूप में मान्यता दी जाए। बसुनिया ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रविवार को दिल्ली में होंगे, जहां टीएमसी के बागी सांसद उनके साथ एक बड़ी बैठक करेंगे। बागी टीएमसी सांसदों के एनडीए को समर्थन देने से संसद में बीजेपी को और मजबूती मिलेगी, जिससे सदन में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की चुनौती भी कमजोर हो जाएगी।
ममता बनर्जी की पकड़ हुई कमजोर?
पिछले महीने बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही टीएमसी के भीतर बगावत चरम पर है। माना जा रहा है कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की अपने विधायक दल पर पकड़ ढीली हो गई है। हाल ही में पार्टी के 80 में से करीब 60 विधायकों ने अपना एक अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया था। अब लोकसभा में भी इस तरह की बगावत का साफ मतलब है कि टीएमसी संसदीय दल भी दो फाड़ होने के मुहाने पर है। बसुनिया ने स्पष्ट किया कि फिलहाल 19 सांसद उनके साथ हैं, लेकिन "हमारे दरवाजे किसी भी अन्य सांसद के लिए खुले हैं जो आना चाहता है। हम असली टीएमसी के तौर पर पहचान चाहते हैं और एनडीए का हिस्सा बनना चाहते हैं।"
अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से भयंकर नाराजगी
बागी सांसदों ने अलग रास्ता चुनने की सबसे बड़ी वजह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के रवैये को बताया है। बसुनिया ने आरोप लगाते हुए कहा, "जब तक ममता बनर्जी का टीएमसी पर नियंत्रण था, तब तक सब ठीक था। लेकिन जब से नेतृत्व अभिषेक बनर्जी के हाथों में गया, पार्टी एक कॉरपोरेट कंपनी बनकर रह गई है। वह नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ नौकरों जैसा व्यवहार करते हैं। विधायक हों या सांसद, हर कोई नाराज है। आपने देखा होगा कि तीन राज्यसभा सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। अभिषेक किसी के लिए उपलब्ध नहीं रहते, इसलिए सभी में नाराजगी है।"
क्षेत्र के विकास के लिए चाहिए बीजेपी का साथ
सांसदों के एनडीए के साथ जाने के सवाल पर बसुनिया ने तर्क दिया कि जनता ने उन्हें 2029 तक के लिए अपना सांसद चुना है। बंगाल में अब बीजेपी चुनाव जीत चुकी है और केंद्र में भी उसी की सरकार है। उन्होंने कहा, "अगर हमें अपने क्षेत्रों में कुछ विकास कार्य करने हैं, तो हमें बीजेपी का समर्थन चाहिए। हम उन लोगों के प्रति जवाबदेह हैं जिन्होंने हमें चुना है। इसलिए हमने यह अलग गुट बनाने का फैसला किया है ताकि लोगों के लिए कुछ कर सकें।" चुनाव आयोग (EC) के पास जाने के सवाल पर बसुनिया ने साफ किया कि वे पहले स्पीकर से अलग गुट की मान्यता मांगेंगे और उसके बाद ही चुनाव आयोग का रुख करेंगे। उन्होंने कहा, "अवश्य जाएंगे।"
दिग्गज नेता भी खोल रहे हैं मोर्चा
इस बीच, पार्टी के अंदर का असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद और ममता के करीबी माने जाने वाले कल्याण बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता के कालीघाट आवास पर बुलाई गई ममता की नियमित बैठक से दूरी बना ली। यह कदम उनके उस बयान के एक दिन बाद सामने आया है जिसमें कल्याण ने कहा था कि ममता बनर्जी को अभिषेक और उन वरिष्ठ नेताओं के बीच किसी एक को चुनना होगा जो उनसे "नाखुश" हैं। इसके अलावा, एक और दिग्गज नेता और ममता के खास माने जाने वाले अनुब्रत मंडल ने भी पार्टी की इस दुर्दशा के लिए अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक रणनीतिकार आई-पैक (I-PAC) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।




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