अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस से 3 मौतें, यह क्या है और कैसे फैला; भारत के लिए कितना खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल को अर्जेंटीना से रवाना हुई यह शिप अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक के द्वीपों की यात्रा पर थी। लगभग 147 लोगों (88 यात्री और 59 क्रू सदस्य) वाले इस जहाज पर 6 से 28 अप्रैल के बीच बीमारियां शुरू हुईं।

एटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास डच क्रूज शिप एमवी होंडियस फंसी हुई है, जहां हंता वायरस के प्रकोप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को अलर्ट कर दिया है। 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुई यह शिप अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक के द्वीपों की यात्रा पर थी। लगभग 147 लोगों (88 यात्री और 59 क्रू सदस्य) वाले इस जहाज पर 6 से 28 अप्रैल के बीच बीमारियां शुरू हुईं। WHO के अनुसार, हंता वायरस से संक्रमित 3 लोगों की मौत हो गई है। एक व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार है और तीन पीड़ितों में हल्के लक्षण हैं। तीन लोगों को जहाज से निकाला जा चुका है, जबकि चार अभी सवार हैं।
हंता वायरस क्या है?
हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों के मूत्र, मल या लार से फैलता है। यह बीमारी फेफड़ों में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकती है। लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और तेजी से श्वसन संकट शामिल हैं। WHO के मुताबिक, इस मामले में संभवतः मानव-से-मानव संक्रमण भी हुआ, जो दुर्लभ है। दक्षिण अमेरिकी हंता वायरस में यह देखा गया है। यात्री दक्षिण अमेरिका में चूहों या वन्यजीवों से संपर्क में आए होंगे। एक ब्रिटिश मरीज को जोहान्सबर्ग ले जाकर ICU में भर्ती किया गया, जहां इसकी पुष्टि हुई। दूसरी मौतें जहाज पर और सेंट हेलेना में हुईं।
जहाज की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
केप वर्डे की स्वास्थ्य मंत्रालय ने पब्लिक हेल्थ कारणों से डॉकिंग की इजाजत नहीं दी, इसलिए जहाज अभी खड़ा है। WHO, नीदरलैंड, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन के साथ तालमेल जारी है। मेडिकल टीमें कई बार जहाज पर पहुंची हैं। स्पेन के कैनरी द्वीपों की ओर यात्रा की इजाजत पर चर्चा चल रही है। यात्री और क्रू को 45 दिनों तक आइसोलेशन, मास्क, हैंड हाइजीन और दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। WHO ने वैश्विक जोखिम को कम बताया है, लेकिन जांच जारी है।
भारत के लिए चिंता का विषय?
भारत में हंता वायरस के मामले दुर्लभ हैं। यह घटना भारत के लिए सीधा खतरा नहीं है क्योंकि शिप अटलांटिक में है और यात्री 23 देशों के हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा के युग में सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय को यात्रियों की निगरानी बढ़ानी चाहिए, खासकर दक्षिण अमेरिका या अफ्रीका से आने वालों की। WHO की सलाह है कि इको-टूरिज्म या रोडेंट वाले क्षेत्रों में सावधानी बरती जाए। भारत की मजबूत पब्लिक हेल्थ सिस्टम और कोविड अनुभव इसे संभालने में मदद करेगा, लेकिन अनावश्यक घबराहट नहीं करनी चाहिए।




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