ममता बनर्जी की पार्टी में भूचाल, TMC ने दो विधायकों को किया OUT; क्या कारण?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सनसनीखेज खुलासे के बाद पार्टी ने अपने ही दो विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सनसनीखेज खुलासे के बाद पार्टी ने अपने ही दो विधायकों ( ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा) को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया।
तृणमूल उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दोनों विधायकों ने पार्टी की बैठकों में बार-बार अनुपस्थिति दर्ज कराई, पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया और ऐसे बयान दिए जो पार्टी के हितों के विरुद्ध थे। पार्टी के सक्षम प्राधिकारी ने इन गंभीर आरोपों पर विचार करने के बाद निष्कासन का फैसला लिया।
शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तृणमूल का भ्रष्टाचार अब अपनी ही पार्टी के विधायकों को निशाना बना रहा है। उन्होंने अपने विधायकों के हस्ताक्षर चुरा लिए। ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने खुद इस जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई है। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल सीआईडी इस हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच कर रही है। मामले में तृणमूल के कई वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। आज अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जानकारी के अनुसार वे सीआईडी के समक्ष पेश नहीं हुए।
निष्कासित विधायक का पलटवार
दूसरी ओर पार्टी से निकाले गए संदीपान साहा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी पर सीधा आरोप लगाया। साहा ने कहा कि विधायकों की सूची पर पार्टी महासचिव ने ही हस्ताक्षर किए थे। जो विधायक वहां मौजूद नहीं थे, उनके हस्ताक्षर जमा करना बहुत बड़ी भूल थी। अभिषेक बनर्जी महासचिव के रूप में जिम्मेदार थे। सूची में इतनी गलतियां होने के कारण उन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पार्टी में बढ़ती बेचैनी
बता दें कि यह घटना उस समय सामने आई है जब तृणमूल कांग्रेस सत्ता खोने के बाद अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में जूझ रही है। हाल ही में लोकसभा सांसद काकोली घोष ने पार्टी के आंतरिक मामलों पर असंतोष जताते हुए सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया था।




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