बंगाल को मिलेगा पहला मुस्लिम CM, ममता बनर्जी को चुनौती देकर किसने कर दिया ऐलान?
2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में केंद्रित हैं। 2021 में TMC ने इनमें से अधिकांश जिलों में जबरदस्त जीत हासिल की थी।

West Bengal Elections: तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बंगाल चुनावों से पहले बड़ा बयान दिया है। हुमायूं कबीर ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने का मुद्दा बड़ा फैक्टर बन सकता है। यहीं नहीं उन्होंने TMC प्रमुख ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा है कि आजादी के बाद बंगाल में पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री बन सकता है।
पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में हुमायूं कबीर ने दावा किया कि राज्य में मुसलमानों के बीच बढ़ती राजनीतिक मुखरता की भावना चुनावी नतीजों पर काफी असर डाल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और अगर चुनाव के नतीजे किसी एक पार्टी के पक्ष में नहीं आते तो सरकार बनाने में उनकी पार्टी एक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
कबीर का बड़ा दावा
कबीर ने कहा, "अगर हमारी पार्टी सरकार बनाती है, तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री बनेगा। लेकिन अगर हम सरकार नहीं भी बनाते हैं, तो भी हम इतनी सीटें जीतेंगे कि हमारे बिना कोई सरकार बन ही नहीं पाएगी।" उन्होंने आगे कहा, “ऐसी स्थिति में, मैं उपमुख्यमंत्री के पद की मांग करूंगा। मैं यह साफ-साफ कह रहा हूं, इस चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में कोई मुस्लिम उपमुख्यमंत्री ज़रूर बनेगा, भले ही मुख्यमंत्री ना बने। आप यह बात मुझसे लिखकर ले सकते हैं।” 62 वर्षीय हुमायूं कबीर ने कहा, “बाबरी मस्जिद एक भावना है। मैंने अपने समुदाय के उस जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश की है। बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर अगर 100 मुसलमान वोट देने जाते हैं, तो उनमें से 80 मेरी पार्टी के उम्मीदवारों को ही वोट देंगे। 4 मई तक इंतजार कीजिए, आपके सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।”
मुसलमानों की कितनी हिस्सेदारी?
बता दें कि 2011 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में केंद्रित हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में, TMC ने इनमें से अधिकांश जिलों में जबरदस्त जीत हासिल की थी। मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों में से सत्ताधारी पार्टी ने 20 सीटें जीती थीं। वहीं मालदा में, उसने 12 में से आठ सीटें हासिल कीं। उत्तर दिनाजपुर में TMC ने छह में से चार सीटें जीती थीं।
हुमायूं कबीर ने तर्क दिया कि मुस्लिम मतदाता, जिनका उनके दावे के अनुसार 114 विधानसभा क्षेत्रों पर प्रभाव है, TMC से लगातार असंतुष्ट होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सीटों पर, मुस्लिम मतदाता जिस भी तरफ वोट देंगे, वही उम्मीदवार विजेता बनेगा। उन्होंने कहा, "मुसलमान आबादी का लगभग 37 प्रतिशत और मतदाताओं का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं। फिर भी TMC ने केवल 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। अगर वे सचमुच इस हिस्सेदारी का सम्मान करते, तो कम से कम 90 से 100 मुस्लिम उम्मीदवार होने चाहिए थे। जिन 182 सीटों पर हम चुनाव लड़ेंगे, उनमें से 100 से ज्यादा उम्मीदवार मुस्लिम होंगे। इससे पता चलता है कि मुसलमानों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में कौन गंभीर है।”
मुसलमानों के TMC ने कुछ नहीं किया- हुमायूं कबीर
कबीर ने TMC पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा तो करती है, लेकिन असल में उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखती है। उन्होंने कहा, "TMC ने मुसलमानों के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया है। मुसलमानों ने सालों तक TMC को वोट दिया, क्योंकि हमने उनसे ऐसा करने को कहा था। अब हम उनसे कह रहे हैं कि वे TMC को वोट ना दें। वे हमारी बात मानते हैं या उनकी, यह नतीजे आने पर साफ हो जाएगा।”
2 सीटों से मैदान में उतरे
इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता हुमायूं कबीर ने अपनी नवगठित आम जनता उन्नयन पार्टी के 15 उम्मीदवारों की पहली सूची की बुधवार को घोषणा की। कबीर ने बताया कि पार्टी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 182 सीट पर चुनाव लड़ेगी और बहुचर्चित भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी। बता दें कि कबीर को पिछले साल तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। वह बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मुर्शिदाबाद जिले में एक मस्जिद के निर्माण की अपनी योजना को लेकर हाल के महीनों में सुर्खियों में रहे हैं। उनके इस कदम को लेकर राज्य में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हुईं।कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की दो सीट रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ेंगे, जो उनके पुराने राजनीतिक आधार भरतपुर से अलग है। यहां से उन्होंने पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी।




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