Will Suvendu Adhikari be able to retain the seat where even Mamata lost Ground Report from Bhabanipur जहां ममता भी हारीं, वह सीट बचा पाएंगे शुभेंदु अधिकारी? भवानीपुर की ग्राउंड रिपोर्ट, West-bengal Hindi News - Hindustan
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जहां ममता भी हारीं, वह सीट बचा पाएंगे शुभेंदु अधिकारी? भवानीपुर की ग्राउंड रिपोर्ट

जग्गू बाबू बाजार के दुकानदारों में निराशा है। उनका आरोप है कि सड़कें महीनों से खुदी पड़ी हैं और व्यापार मंदा है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि राज्य में युवाओं के लिए अवसरों की कमी है और वे परिवर्तन चाहते हैं।

Fri, 20 March 2026 10:39 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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जहां ममता भी हारीं, वह सीट बचा पाएंगे शुभेंदु अधिकारी? भवानीपुर की ग्राउंड रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए शंखनाद हो चुका है और सबकी निगाहें कोलकाता की भवानीपुर सीट पर टिक गई हैं। 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी एक बार फिर आमने-सामने होंगे। यह मुकाबला महज एक चुनावी लड़ाई नहीं, बल्कि एक 'रीमैच' के तौर पर देखा जा रहा है।

साल 2021 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद कड़े मुकाबले में मामूली अंतर से हरा दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव लड़कर प्रियंका टिबरेवाल के खिलाफ 58,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। अब शुभेंदु अधिकारी ने सीधे ममता के गढ़ में उन्हें चुनौती देकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

भवानीपुर को अक्सर कोलकाता का "मिनी इंडिया" कहा जाता है क्योंकि यहां की जनसांख्यिकी बेहद विविध है। यहां की कुल आबादी का लगभग 40% हिस्सा बंगाली हिंदुओं का है। गैर-बंगाली मतदाताओं में मारवाड़ी, पंजाबी, गुजराती और बिहारी समुदाय मिलकर करीब 40% हिस्सा बनाते हैं। यहां अल्पसंख्यक समुदाय के भी लगभग 20% मतदाता हैं।

यहां एक ओर बड़े उद्योगपतियों के आलीशान बंगले हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में झुग्गी बस्तियां भी हैं। प्रत्याशियों की किस्मत इन्हीं दोनों छोरों के बीच संतुलित है।

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एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां इस साल भी मुकाबला काफी रोचक है। वार्ड नंबर 72 की निवासी सुषमा देवी पेयजल की समस्या सुलझने से खुश हैं। वहीं, 27 वर्षीय पूजा का कहना है कि 'कन्याश्री' और 'विधवा पेंशन' जैसी योजनाओं ने सीधे उनके घर की आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। उनका मानना है कि "बंगाल अपनी बेटी को ही चुनेगा।"

जग्गू बाबू बाजार के दुकानदारों में निराशा है। उनका आरोप है कि सड़कें महीनों से खुदी पड़ी हैं और व्यापार मंदा है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि राज्य में युवाओं के लिए अवसरों की कमी है और वे परिवर्तन चाहते हैं।

चुनाव से पहले ही दोनों दलों ने लोकलुभावन घोषणाओं की झड़ी लगा दी है। भाजपा ने वादा किया है कि सत्ता में आने के दो महीने के भीतर सरकारी नौकरियों में भर्ती शुरू की जाएगी और सरकारी नौकरियों के लिए पात्रता की आयु 35 से बढ़ाकर 40 वर्ष की जाएगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही 'युवा साथी' योजना शुरू कर दी है, जिसके तहत 40 वर्ष तक के बेरोजगार युवाओं को 5 साल तक या नौकरी मिलने तक 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।

जैसे-जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है, भवानीपुर की गलियों में राजनीतिक तापमान भी आसमान छू रहा है। एक तरफ ममता बनर्जी के पास अपनी साख और विकास कार्यों का आधार है, तो दूसरी तरफ शुभेंदु अधिकारी 'नंदीग्राम' के करिश्मे को कोलकाता के दिल में दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। 29 अप्रैल का दिन तय करेगा कि भवानीपुर का सुल्तान कौन होगा।