हम AI युग में हैं, फिर 3 मिनट के भाषण का 8 मिनट की ट्रांसक्रिप्ट कैसे? वांगचुक केस में SC के तीखे सवाल
सिब्बल ने कोर्ट के सामने पेश किए गए ट्रांसलेट किए गए मटीरियल के असली होने पर सवाल उठाया और कहा कि वांगचुक ने अपनी हड़ताल जारी रखी और नेपाल का जिक्र करके युवाओं को भड़काना भी जारी रखा। यह लाइन कहाँ से आ रही है?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ केंद्र द्वारा पेश एक वीडियो के ट्रांसक्रिप्ट (लिखित प्रतिलिपि) पर नाखुशी जताई और ट्रांसक्रिप्ट की लंबाई को लेकर तीखे सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में अनुवाद बिल्कुल सटीक होना चाहिए। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि सरकार वांगचुक के बयानों की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट पेश करे, क्योंकि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कार्यकर्ता के नाम पर कुछ ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं।
पीठ ने कहा, ''मिस्टर सॉलिसिटर, हमें भाषण की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए। जिस पर उन्होंने भरोसा किया है और जो आप कह रहे हैं, वह अलग है। हम निर्णय करेंगे। उन्होंने जो कहा है, उसकी वास्तविक प्रतिलिपि होनी चाहिए। आपके पास अपने कारण हो सकते हैं।'' इसके साथ पीठ ने कहा, ''कम से कम उन्होंने जो कहा, उसका तो सही अनुवाद होना चाहिए…... आपका अनुवाद सात से आठ मिनट तक चलता है, जबकि भाषण केवल तीन मिनट का ही है। हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में हैं; अनुवाद में कम से कम 98 प्रतिशत की सटीकता होनी चाहिए।''
सिब्बल ने ट्रांस्क्रिप्ट पर सवाल उठाए
इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि वांगचुक की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने अनुवाद पर सवाल उठाते हुए कहा, ''वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा…... और नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाना भी जारी रखा…... यह पंक्ति कहां से आ रही है? यह एक बहुत ही अनोखा नजरबंदी आदेश है - आप ऐसी बात पर भरोसा कर रहे हैं जो मौजूद ही नहीं है और फिर कहते हैं कि यह व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित है।''नटराज ने अदालत को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट के लिए एक विभाग है और कहा, ''हम इसमें विशेषज्ञ नहीं हैं।'' इस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को फिर से होगी।
वांगचुक की 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई
केंद्र ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि वांगचुक की हिरासत के बाद से 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वह ''स्वस्थ, तंदुरुस्त और ठीक हैं।'' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक की नजरबंदी का आदेश जारी किया गया था, वे अब भी बने हुए हैं और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें रिहा करना संभव नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका), 1980 के तहत उनकी (वांगचुक की) नजरबंदी को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है।




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