गांधीजी से उनकी तुलना न करें मीलॉर्ड! कल बन जाएगी हेडलाइन; सोनम वांगचुक केस में क्यों बोले SG
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उनके पति को शांतिपूर्ण विरोध करने और सरकार की आलोचना का लोकतांत्रिक अधिकार है और इससे देश की सुरक्षा को खतरा नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लेने के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार उनके बयानों का कुछ ज्यादा ही मतलब निकाल रही है। बुधवार को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की उनकी प्रिवेंटिव डिटेंशन के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। याचिका का विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने कहा कि वांगचुक ने धमकी दी थी कि नेपाल जैसा हिंसक आंदोलन लद्दाख में भी हो सकता है और युवा शांतिपूर्ण तरीकों के असर पर शक जता रहे हैं लेकिन कोर्ट ने कहा कि उनके बयान का पूरा संदर्भ देखना जरूरी है, क्योंकि वह हिंसा की चेतावनी देने के बजाय चिंता जता रहे थे।
बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, "वह परेशान हैं...हमें पूरा वाक्य लेना होगा...इसे पढ़ना होगा...'कुछ लोग गांधी के शांतिपूर्ण तरीके छोड़ रहे हैं। यह चिंता की बात है'...ध्यान अहिंसक तरीके से हटने पर है, यह चिंता की बात है।" इसके जवाब में, ASG नटराज ने कहा कि वांगचुक ने अपने भाषण में "हाइब्रिड एक्सप्रेशन" का इस्तेमाल किया था। इस पर कोर्ट ने कहा, “बहुत ज्यादा मतलब निकाला जा रहा है।”
मीडिया इसे अलग तरीके से हाईलाइट करेगा
बाद में सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को वांगचुक की तुलना महात्मा गांधी से नहीं करनी चाहिए। मेहता ने कहा, "मुझे बताया गया कि आपने गांधीजी का आखिरी भाषण पढ़ा। हमें राष्ट्रपिता के साथ ऐसी किसी चीज का महिमामंडन नहीं करना चाहिए जो पूरी तरह से भारत विरोधी हो।" हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इसे कुछ अलग संदर्भ में पढ़ा गया था। मेहता ने चिंता जताई कि मीडिया इसे अलग तरीके से हाईलाइट करेगा।
आप राई का पहाड़ क्यों बना रहे
इसके साथ ही SG ने कहा, "यह कल की हेडलाइन न बने कि आपके लॉर्डशिप ने पिटीशनर की तुलना गांधीजी से की। हमें कॉन्टेक्स्ट देखना होगा। यह हेल्थ का दिखावा भी सोशल मीडिया का दिखावा है।" कोर्ट ने कहा कि उसे इस बात से कोई मतलब नहीं है कि बाहर क्या होता है। ASG नटराज से अपनी दलीलें फिर से शुरू करने को कहते हुए बेंच ने कहा, “आप राई का पहाड़ क्यों बना रहे हैं? अगर आप कहते हैं कि हमें सवाल नहीं पूछने चाहिए, तो हम नहीं पूछेंगे।”
क्या है सोनम वांगचुक का मामला?
दरअसल, यह मामला केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठे शेड्यूल का दर्जा देने की मांग को लेकर सितंबर 2025 में लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लेने से जुड़ा है। यह मामला तब शुरू हुआ जब वांगचुक को 2025 में लेह में हुए प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। सरकार का कहना है कि वांगचुक के भाषणों से लोगों को भड़काया जा सकता था और लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। वहीं सरकार ने यह भी कहा कि उनकी हिरासत के सभी कानूनी नियमों का पालन किया गया।
अदालत ने हिरासत पर दोबारा विचार करने को कहा था
इधर, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उनके पति को शांतिपूर्ण विरोध और सरकार की आलोचना का लोकतांत्रिक अधिकार है और इससे देश की सुरक्षा को खतरा नहीं माना जा सकता। स्वास्थ्य को लेकर भी कोर्ट और सरकार के बीच बहस चल रही है। कोर्ट ने पहले सरकार से हिरासत पर दोबारा विचार करने को कहा था, लेकिन सरकार ने बताया कि वांगचुक की मेडिकल जांच कई बार हुई है और उनकी हालत चिंताजनक नहीं है। सरकार का यह भी दावा है कि अगर समय पर कार्रवाई नहीं की जाती तो हालात ज्यादा खराब हो सकते थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की हिरासत से जुड़े दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्ड मांगे हैं। मामले की अगली सुनवाई जारी रहने वाली है और इस फैसले पर पूरे देश की नजर है।




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