सोनम वांगचुक को हिरासत में क्यों लिया? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिया जवाब, लगाए गंभीर आरोप
सरकार ने स्पष्ट किया कि लद्दाख चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा वाला नाजुक क्षेत्र है, इसलिए ऐसे उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वांगचुक सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसक प्रदर्शनों के बाद 26 सितंबर को हिरासत में लिए गए थे, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया है, क्योंकि उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को उकसाने का प्रयास किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ को बताया कि वांगचुक पाकिस्तान और चीन से सटे संवेदनशील बॉर्डर इलाके में भड़काऊ भाषण दे रहे थे, जहां क्षेत्रीय संवेदनशीलता बहुत अधिक है। मेहता ने दावा किया कि वांगचुक ने 'जेन जेड' (1997-2012 के बीच जन्मे युवाओं) को नेपाल और बांग्लादेश जैसे विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाने की कोशिश की, साथ ही अरब स्प्रिंग जैसे आंदोलनों का जिक्र किया, जिनसे कई देशों में सरकारें गिर गई थीं। सरकार का कहना है कि उनके भाषण राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते थे, इसलिए हिरासत उचित है और सभी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया।
केंद्र ने आगे जोर दिया कि वांगचुक के भाषणों में युवाओं को गुमराह करने का प्रयास था, जिसमें उन्होंने लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसी अशांति की स्थिति में धकेलने की कोशिश की। मेहता ने पीठ से कहा कि वांगचुक ने महात्मा गांधी के उद्धरणों का चयनात्मक इस्तेमाल कर अपनी मंशा छिपाने की कोशिश की, जबकि वास्तव में वे 'हम' और 'वे' का विभाजन पैदा कर रहे थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि लद्दाख चीन और पाकिस्तान से लगती सीमा वाला नाजुक क्षेत्र है, इसलिए ऐसे उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वांगचुक सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसक प्रदर्शनों के बाद 26 सितंबर को हिरासत में लिए गए थे, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। वे वर्तमान में जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
रासुका के तहत हिरासत को चुनौती
यह मामला वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो की ओर से दायर याचिका पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने रासुका के तहत हिरासत को चुनौती दी है। याचिका में दावा किया गया है कि हिरासत मनमानी और असंवैधानिक है। सुनवाई के दौरान केंद्र ने हिरासत को पूरी तरह उचित ठहराया और कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ है। अदालत ने मामले में दलीलें सुनने के बाद सुनवाई को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
लद्दाख के लिए क्या है मांग
यह घटनाक्रम लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग से जुड़े लंबे संघर्ष को दर्शाता है। वांगचुक जैसे कार्यकर्ता लद्दाख की पर्यावरणीय सुरक्षा और स्थानीय अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ देख रही है। मामले की अगली सुनवाई में और तथ्य सामने आ सकते हैं।




साइन इन