कोलकाता में पीएम मोदी की रैली से पहले झड़प; बीजेपी और टीएमसी के कार्यकर्ता भिड़े, पथराव में कई घायल
बीजेपी समर्थकों का आरोप है कि वे प्रधानमंत्री के समर्थन में रैली स्थल की ओर जा रहे थे, तभी बिना उकसावे के उन पर पथराव शुरू हो गया। कई वाहनों को नुकसान पहुंचा और उनके साथ गाली-गलौज भी की गई।

कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से ठीक कुछ घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। यह घटना शनिवार को केंद्रीय कोलकाता के गिरिश पार्क इलाके में हुई, जो ब्रिगेड परेड ग्राउंड से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। पीएम मोदी की यह रैली बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के समापन का हिस्सा थी, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित की जा रही थी। झड़प में दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पथराव किया और नारे लगाए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
बीजेपी समर्थकों का आरोप है कि वे प्रधानमंत्री के समर्थन में रैली स्थल की ओर जा रहे थे, तभी बिना उकसावे के उन पर पथराव शुरू हो गया। उन्होंने दावा किया कि कई वाहनों को नुकसान पहुंचा और उनके साथ गाली-गलौज भी की गई। कुछ पत्थर पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री शशि पांजा के आवास की ओर भी फेंके गए। उन्होंने कहा कि TMC के 50 कार्यकर्ता घायल हुए हैं। एक बीजेपी कार्यकर्ता ने स्थानीय बंगाली न्यूज चैनल को बताया कि हमला पूरी तरह से असहाय था। इस दौरान एक पुलिस अधिकारी और एक बीजेपी नेता घायल हो गए।
दोनों एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप
दूसरी ओर, टीएमसी कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा बीजेपी पर आरोप लगाया। उनका कहना था कि बीजेपी समर्थकों ने पहले गाली-गलौज शुरू की और पथराव किया। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय टीएमसी नेताओं के घरों पर भी पत्थर फेंके गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को हिंसा भड़काने का जिम्मेदार ठहराया, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। यह घटना चुनावी माहौल में बढ़ती राजनीतिक तनाव को दर्शाती है।
पुलिस ने तुरंत बड़ी संख्या में बल पहुंचाकर स्थिति को नियंत्रित किया। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने झड़प को शांत कराया और इलाके में शांति बहाल की। प्रधानमंत्री मोदी की रैली ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर निर्धारित थी, जहां वे 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने वाले थे। यह झड़प पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले की बढ़ती सियासी गर्मी का संकेत है, जहां दोनों दल जोर-आजमाइश कर रहे हैं।




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