Indian researcher Syed Shamir Hussain discovered nearly years old trident trishul Vajra सनातन धर्म के 10 हजार साल पुराने निशान, खनन में मिला त्रिशूल और वज्र; कितनी बड़ी सफलता, India News in Hindi - Hindustan
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सनातन धर्म के 10 हजार साल पुराने निशान, खनन में मिला त्रिशूल और वज्र; कितनी बड़ी सफलता

त्रिशूल और वज्र सनातन धर्म के प्रमुख प्रतीक हैं। त्रिशूल भगवान शिव की शक्ति, संतुलन और विनाश-निर्माण के गुणों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वज्र इंद्र का हथियार है, जो शक्ति, वर्षा और युद्ध से जुड़ा है। 

Sat, 14 March 2026 02:47 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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सनातन धर्म के 10 हजार साल पुराने निशान, खनन में मिला त्रिशूल और वज्र; कितनी बड़ी सफलता

फिलीपींस में खनन कार्य के दौरान भारतीय शोधकर्ता सैयद शमीर हुसैन ने लगभग 10,000 वर्ष पुराने त्रिशूल और 3,000 वर्ष पुराने वज्र की खोज की है, जिन्हें वे सनातन धर्म के प्राचीन प्रतीकों से जोड़ते हैं। यह खोज मई 2015 में हुई, जब खनिकों ने असामान्य वस्तुओं को देखकर हुसैन को सूचित किया। हुसैन ने 2012 से फिलीपींस में स्थानीय समुदायों के साथ काम किया था। जांच के बाद उन्होंने त्रिशूल को भगवान शिव का प्रतीक और वज्र को भगवान इंद्र का आयुध बताया। ये कलाकृतियां 2016 में भारत लाई गईं, जहां हुसैन ने इन पर लगभग 10 वर्षों तक शोध किया। इस खोज ने प्राचीन भारतीय संस्कृति के दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैलाव पर नई बहस छेड़ दी है।

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त्रिशूल और वज्र सनातन धर्म के प्रमुख प्रतीक हैं। त्रिशूल भगवान शिव की शक्ति, संतुलन और विनाश-निर्माण के गुणों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वज्र इंद्र का हथियार है, जो शक्ति, वर्षा और युद्ध से जुड़ा है। हुसैन का दावा है कि ये वस्तुएं हजारों वर्ष पुरानी हैं और फिलीपींस में मिलना भारतीय सभ्यता की प्राचीनता व वैश्विक प्रभाव को प्रमाणित करता है। उन्होंने इन कलाकृतियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय और भारतीय संग्रहालयों में पंजीकृत कराया है, जहां इन्हें ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं के रूप में मान्यता मिली है। यह खोज सांस्कृतिक एकता और प्राचीन व्यापार या प्रवास के प्रमाण के रूप में देखी जा रही है।

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त्रिशूल और वज्र की कीमत

शोधकर्ता सैयद शमीर हुसैन ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन कलाकृतियों को सार्वजनिक किया। उन्होंने बताया कि खोज के दौरान उन्हें सांप काटने जैसी घटना हुई, लेकिन वे बच गए। हुसैन ने प्रधानमंत्री और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखे हैं। वे इन वस्तुओं की नीलामी कर प्राप्त राशि अनाथालयों और वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। त्रिशूल की अनुमानित शुरुआती कीमत 500 करोड़ रुपये और वज्र की 250 करोड़ बताई गई है। यह उनकी चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, जिसमें वैज्ञानिक, इतिहासकार और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। हुसैन ने कहा कि ऐसी दुर्लभ खोज विश्व की 8.8 अरब आबादी में बहुत कम लोगों को नसीब होती है।

यह खोज सनातन धर्म की वैश्विक जड़ों को उजागर करती है और भारत-फिलीपींस के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालती है। हालांकि, यह एक निजी शोधकर्ता की ओर से प्रस्तुत दावा है और पुरातात्विक विशेषज्ञों से पूर्ण आधिकारिक पुष्टि अभी लंबित है। फिर भी, यह भारतीय संस्कृति की गहराई और प्राचीनता को दर्शाता है, जो लोगों में गर्व और जिज्ञासा जगाती है।

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