5 पार्टी, बहुमत और फ्लाइट कैंसिल; ऐतिहासिक जीत के बाद और फिल्मी हुई विजय की राजनीतिक एंट्री
Tamil Nadu news: तमिलनाडु विधानसभा में ऐतिहासिक जीत के बाद विजय थलापति ने बहुमत के संघर्ष से भी पार पा ली है। लेकिन यह पांच दिनों की लड़ाई विजय और उनकी पार्टी टीवीके के लिए किसी भी तरह से आसान नहीं रही। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

Vijay Thalapathy Tamil Nadu: तमिलनाडु विधानसभा के लिए बहुमत का सस्पेंस खत्म हो चुका है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ जोसेफ विजय ने राज्यपाल आर्लेकर के सामने बहुमत से ज्यादा विधायकों के समर्थन पत्र को रखकर उनका भरोसा हासिल कर लिया है। राज्यपाल और टीवीके चीफ की सफल बैठक के बाद लोकभवन की तरफ से जारी एक बयान में शपथ ग्रहण समारोह का ऐलान कर दिया गया है। फिल्मी पर्दे पर नजर आने वाले जोसेफ विजय अब कल, यानी 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते हुए नजर आएंगे। फिल्मी पर्दे से आने वाले विजय की राजनीति में एंट्री भी किसी ऐक्शन फिल्म की तरह ही रही है। बहुमत के लिए पिछले पांच दिनों के संघर्ष ने कहानी को और भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया।
4 मई को तमिलनाडु विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले विजय के लिए यह जीत किसी सपने से कम नहीं थी। दोनों क्षेत्रीय पार्टियों के वर्चस्व को तोड़ते हुए विजय ने 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें हासिल कीं। लेकिन विजय दो सीटों पर लड़े थे, इसलिए यह आंकड़ा केवल 107 हो गया। किसी भी नई पार्टी के लिए यह एक बड़ा आंकड़ा था। लेकिन इसके बाद भी विजय बहुमत से दूर रहे। डीएमके, भाजपा और एआईडीएमके का साथ लेने से पहले ही इनकार कर चुके विजय ने सबसे पहले कांग्रेस से संपर्क साधा। दशकों तक डीएमके का साथ देने वाली कांग्रेस ने तुरंत ही समर्थन देने का ऐलान कर दिया। लेकिन कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ भी विजय बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाए।
फिर शुरू हुआ समर्थन जुटाने का फिल्मी मिशन
कांग्रेस का समर्थन लेने के बाद विजय राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के पास पहुंचे। लेकिन राज्यपाल ने संविधान के आर्टिकल 164 का हवाला देते हुए उन्हें 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाने के लिए कहा। लोकभवन से खाली हाथ लौटे विजय और उनके समर्थकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई।
राज्यपाल के साथ पहली बैठक के खत्म होने के बाद विजय और उनके सहयोगियों ने पार्टियों को जोड़ना शुरू कर दिया। भाजपा के खिलाफ एक जुट सीपीआई और सीपीआई एम ने विजय को बाहर से समर्थन देने का ऐलान कर दिया। उनका कहना है कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को राज्य में एंट्री लेने से रोकने के लिए उन्होंने विजय की पार्टी को समर्थन दिया है। लेकिन इन दोनों पार्टियों के चार विधायकों के साथ भी विजय बहुमत के आंकड़े से दूर ही नजर आए।
डीएमके के साथी निकालने की जुगत
विजय को अब उन पार्टियों की जरूरत थी, जो चुनाव में डीएमके और कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ रही थीं। वह पार्टियां थीं वीसीके और आईयीएमएल। इन दोनों को मनाने की कवायद शुरू हुई, लेकिन डीएमके के साथ संबंधों और विजय की नई नवेली पार्टी से जुड़ने का डर ने इनके पैर ठिठका दिए।
शुरुआत में वीसीके चीफ थोल थिरुमावलन ने विजय समर्थन देने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ आईयूएमएल थी, जिसने शुरुआत में संकेत दिए कि वह विजय की पार्टी को समर्थन दे सकती है, लेकिन बाद में उसके प्रमुख शाहजहां से साफ तौर पर इनकार कर दिया कि उन्होंने किसी को भी समर्थन नहीं दिया है। इसके बाद मामला फंसता चला गया। लेकिन अंदर खाने इन छोटी पार्टियों के बीच में लगातार मंथन चल रहा था। इसी क्रम में शुक्रवार देर रात वीसीके के सोशल मीडिया हैंडल से विजय के लिए समर्थन पत्र जारी कर दिया गया। लेकिन बाद में उस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया और थोड़ी देर बाद अकाउंट ही हटा दिया गया।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर
इससे इतर एक और पार्टी AMMK ने विजय की पार्टी के ऊपर आरोप लगाया कि उनके समर्थन पत्र को फर्जी तरीके से दिखाया जा रहा है, जबकि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। इससे मामला और भी ज्यादा पेचीदा होने लगा। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक बार तो खबरें ऐसी भी आईं कि विजय के राजनीतिक उभार को रोकने के लिए धुर विरोधी डीएमके और एआई डीएमके भी साथ आ सकती हैं, लेकिन संभव होता नजर नहीं आया।
शनिवार का दिन विजय के लिए परीक्षा की घड़ी था, अगर समर्थन नहीं मिलता, तो फिर मामला किसी भी तरफ मुड़ सकता था। लेकिन शाम होते-होते विजय की मेहनत रंग लाई और वीसीके और आईयीएमएल ने टीवीके को लिखित समर्थन पत्र सौंप दिए। कुल मिलाकर टीवीके के साथ अब 6 पार्टियों का गठबंधन तमिलनाडु की सत्ता पर बैठा हुआ नजर आएगा।
रद्द हुआ राज्यपाल का केरल दौरा
शनिवार को करीब शाम 5 बजे विजय को बहुमत से तीन ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल हो गया। उस वक्त ऐसा लगा कि फिल्मी हीरो की राजनीतिक एंट्री में जितने सस्पेंस आने थे वह आ चुके हैं। लेकिन तभी एक और सस्पेंस आ धमका। खबर आई कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय के साथ अपनी बैठक को रद्द कर दिया है, क्योंकि वह अपनी पहले से तय कि गई यात्रा पर केरल जा रहे हैं। हालांकि, बाद में लोकभवन की तरफ से बताया गया कि राज्यपाल ने विजय के साथ बैठक के लिए अपनी केरल यात्रा को रद्द कर दिया है।
शपथ का समय फाइनल
इसके बाद शाम 6:30 पर विजय अपने साथियों के साथ राज्यपाल से मिलने के लिए पहुंचे। यहां पर विजय ने अपने साथ लाए विधयकों के समर्थन पत्र को उनको सौंपा। इसके बाद राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। कुछ मिनट चली इस बैठक के बाद विजय शपथ ग्रहण की तैयारी करने के लिए वहां से निकल गए। इसके बाद लोकभवन ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कल यानी रविवार 10 मई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की जानकारी साझा की ।




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