तमिलनाडु का विजय ड्रामा खत्म, अब केरल की बारी! अभी तक सीएम क्यों नहीं तय कर पाई कांग्रेस?
तमिलनाडु में टीवीके चीफ 'थलपति' विजय रविवार सुबह सीएम पद की शपथ लेंगे। वहीं, केरल में प्रचंड जीत के बाद भी कांग्रेस सीएम चेहरा तय नहीं कर पाई है। जानिए केरल में कांग्रेस का पेच कहां फंसा है और रेस में कौन आगे है।

दक्षिण भारत की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल है। तमिलनाडु में पांच दिन से चल रहा सस्पेंस अब खत्म हो गया है और टीवीके (TVK) चीफ 'थलापति' विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, दूसरी तरफ प्रचंड जीत के बावजूद केरल में कांग्रेस अब तक अपना मुख्यमंत्री तय नहीं कर पाई है। केरल का सियासी ड्रामा अब दिल्ली दरबार पहुंच गया है और आलाकमान माथापच्ची में जुटा है। आइए जानते हैं दोनों राज्यों में सरकार गठन को लेकर क्या है ताजा अपडेट और केरल में कांग्रेस का पेच आखिर कहां फंसा है...
तमिलनाडु: रविवार सुबह 10 बजे शपथ लेंगे 'थलपति' विजय
तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर चल रही रस्साकशी का अंत हो गया है। अभिनेता से राजनेता बने विजय कल यानी रविवार 10 मई को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। चेन्नई के लोक भवन में होने वाले इस समारोह के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें न्योता दे दिया है। राज्यपाल ने विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया है।
कैसे मिला बहुमत का जादुई आंकड़ा? विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने दम पर 108 सीटें जीती थीं, जबकि बहुमत के लिए 118 विधायकों की जरूरत थी। शनिवार को वीसीके (VCK) और डीएमके की एक अन्य सहयोगी आईयूएमएल (IUML- 2 विधायक) ने बिना शर्त टीवीके को अपना समर्थन दे दिया। वामपंथी दल और कांग्रेस पहले ही समर्थन का ऐलान कर चुके हैं। इस तरह अब विजय के पास 121 विधायकों का मजबूत समर्थन है।
वीसीके को लेकर क्या थी चर्चा? वीसीके फिलहाल बाहर से समर्थन दे रही है। हालांकि, अंदरखाने पार्टी प्रमुख थोल तिरुमावलवन को डीएमके और एआईएडीएमके के समर्थन से सीएम बनाने की भी चर्चा थी, लेकिन एमके स्टालिन और ईपीएस दोनों ने इसे सिरे से नकार दिया।
विधायक के फर्जी समर्थन पत्र का आरोप: इस बीच, एनडीए की सहयोगी एएमएमके (AMMK) के नेता टीटीवी दिनाकरण ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि टीवीके ने उनके इकलौते विधायक एस. कामराज के समर्थन का 'फर्जी पत्र' राज्यपाल को सौंपा है। हालांकि, टीवीके ने इस आरोप को झूठा करार देते हुए एक वीडियो जारी किया है, जिसमें विधायक अपनी मर्जी से पत्र पर दस्तखत करते दिख रहे हैं।
केरल का सस्पेंस बरकरार, दिल्ली शिफ्ट हुआ घमासान!
तमिलनाडु में जहां तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है, वहीं केरल में यूडीएफ (UDF) की शानदार जीत के बाद भी कांग्रेस सीएम का चेहरा फाइनल नहीं कर पाई है। मुख्यमंत्री की कुर्सी की रेस केरल से शिफ्ट होकर अब दिल्ली पहुंच गई है। सभी प्रमुख दावेदारों को आलाकमान ने दिल्ली तलब कर लिया है।
ये हैं कुर्सी के प्रबल दावेदार: सीएम पद की रेस में वी.डी. सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल का नाम सबसे आगे चल रहा है।
विधायकों की पहली पसंद बने वेणुगोपाल: कांग्रेस आलाकमान के ऑब्जर्वर (अजय माकन और मुकुल वासनिक) ने मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों की मानें तो 80% से ज्यादा विधायकों ने केसी वेणुगोपाल को अपनी पहली पसंद बताया है।
पब्लिक की डिमांड में वी.डी. सतीशन: जहां विधायकों का भारी समर्थन वेणुगोपाल के साथ है, वहीं 'जनभावना' वी.डी. सतीशन के पक्ष में नजर आ रही है। सतीशन को पिछले 5 सालों तक एलडीएफ सरकार के खिलाफ मजबूती से विपक्ष की आवाज उठाने का क्रेडिट दिया जा रहा है। उनके समर्थकों ने सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है।
केरल में कहां फंसा है पेच?
अगर केसी वेणुगोपाल सीएम बनते हैं, तो कांग्रेस को केरल में दो उपचुनाव (एक संसदीय सीट और एक विधानसभा सीट) का सामना करना पड़ेगा।
क्या राहुल गांधी अपने सबसे अहम रणनीतिकार को केरल भेजेंगे? वेणुगोपाल एआईसीसी के महासचिव (संगठन) हैं और संसद से लेकर 'इंडिया' गठबंधन तक में अहम भूमिका निभाते हैं।
एक नया फॉर्मूला यह भी सामने आ रहा है कि सतीशन को रोकने के लिए वेणुगोपाल अपनी दावेदारी से पीछे हट जाएं और अनुभव के आधार पर रमेश चेन्निथला को सीएम की कुर्सी सौंप दी जाए।
फिलहाल केरल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को शक्ति प्रदर्शन से बचने की सख्त हिदायत दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी सभी दावेदारों से बात करके रविवार तक केरल के नए सीएम के नाम का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं।




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