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तमिलनाडु में 'वंदे मातरम' पर क्यों छीड़ी रार? बंगाल में भी मदरसों वाले नियम पर घमासान

तमिलनाडु में सीएम विजय के शपथ ग्रहण में 'वंदे मातरम' बजने पर DMK भड़की, तो वहीं पश्चिम बंगाल के मदरसों में इसे अनिवार्य करने पर CPI(M) कोर्ट जाने की तैयारी में है। जानें 'वंदे मातरम' पर छिड़े इस नए सियासी घमासान की पूरी डिटेल।

Fri, 22 May 2026 10:27 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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तमिलनाडु में 'वंदे मातरम' पर क्यों छीड़ी रार? बंगाल में भी मदरसों वाले नियम पर घमासान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 23 मंत्रियों को विभागों का बंटवारा कर दिया। लेकिन इस ऐतिहासिक कैबिनेट विस्तार से ज्यादा चर्चा एक नए राजनीतिक विवाद की हो रही है। दरअसल, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राज्य गीत 'तमिल थाई वझथु' से पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' बजाया गया, जिस पर प्रमुख विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने कड़ी आपत्ति जताई है। विपक्ष ने इसे तमिल भाषा और संस्कृति का सीधा अपमान बताते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इससे पहले जब विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब भी राष्ट्रीय गीत को प्राथमिकता देने पर विपक्ष ने ऐसा ही मुद्दा उठाया था।

कनिमोझी ने टीवीके (TVK) की चुप्पी पर उठाए सवाल

डीएमके सांसद कनिमोझी ने एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राज्य गीत का अपमान करार दिया। उन्होंने लिखा, "टीवीके सरकार के कैबिनेट शपथ ग्रहण समारोह में दूसरी बार तीसरे गीत को गाकर 'तमिल थाई वझथु' का अपमान किया गया है, जो कड़ी निंदा के योग्य है। पिछली बार जब ऐसा हुआ था, तब टीवीके सरकार ने कहा था कि 'ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।' तो अब अपनी आंखों के सामने यह सब होते देख वे चुप क्यों हैं?"

'राज्यपाल के दबाव में है सरकार'

डीएमके प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने राज्यपाल को 'बीजेपी का आदमी' बताते हुए कहा, "तमिलनाडु सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। वे राज्यपाल के दबाव में हैं, जो बीजेपी के व्यक्ति हैं। वे तमिल और तमिलनाडु की परंपराओं का अपमान करेंगे।"

डीएमके के एक अन्य वरिष्ठ नेता आरएस भारती ने भी सरकार पर तमिल भाषा और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। भारती ने चिंता जताते हुए कहा, "आने वाले दिनों में मुझे लगता है कि तमिलनाडु विकास के मामले में तीसरे या चौथे स्थान पर खिसक जाएगा, जबकि एमके स्टालिन के कार्यकाल में यह पहले स्थान पर था।" उन्होंने इस विवाद को डीएमके के हिंदी थोपने के वैचारिक विरोध और 1965 के आंदोलन से भी जोड़ा।

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MDMK ने भी जताया कड़ा विरोध

मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (MDMK) के महासचिव वाइको ने भी इस मुद्दे पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा, "राज्यपाल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' को बार-बार लाया और थोपा जा रहा है। हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु सरकार के किसी भी कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' को जगह नहीं दी जानी चाहिए।" वाइको ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में सबसे पहले 'तमिल थाई वझथु' और उसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' ही गाया जाना चाहिए। उन्होंने इस विवाद के लिए सीधे तौर पर राजभवन को जिम्मेदार ठहराया।

बीजेपी का पलटवार: 'कांग्रेस से सावधान रहे TVK'

विपक्ष के इन हमलों पर बीजेपी नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने करारा पलटवार किया। उन्होंने 'वंदे मातरम' की आलोचना करने पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया और मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके को कांग्रेस से गठबंधन को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। सुंदरराजन ने कहा, "कांग्रेस का एकमात्र मकसद सत्ता की भूख है। इसी कारण वे टीवीके के साथ जुड़े हैं, टीवीके को इस गठबंधन को लेकर सावधान रहना चाहिए। भारी भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण लगभग सभी राज्यों में कांग्रेस को खारिज कर दिया गया है। नई सरकार के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन चिंता का विषय है।"

क्या था सरकार का पुराना तर्क?

इससे पहले, जब सीएम विजय के शपथ ग्रहण में राष्ट्रीय गीत को प्राथमिकता दी गई थी, तब तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन ने दावा किया था कि "केंद्र सरकार के एक नए सर्कुलर" के कारण 'तमिल थाई वझथु' को तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया था। उन्होंने तब भरोसा दिलाया था कि भविष्य में राज्य में इस प्रथा का पालन नहीं किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल में सभी मदरसों और स्कूलों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य, भड़की CPI(M) जाएगी हाईकोर्ट

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक अहम बदलाव किया है। स्कूल शिक्षा विभाग के दायरे में आने वाले राज्य भर के सभी स्कूलों और मदरसों में अब कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा (असेंबली) में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार के इस निर्देश के बाद वामपंथी दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं, जबकि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इसकी खुलकर तारीफ की है।

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CPI(M) ने बताया 'असंवैधानिक', दी कोर्ट जाने की चेतावनी

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के सांसद बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। गुरुवार को न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए भट्टाचार्य ने इस फैसले को 'अत्यधिक अनियमित और असंवैधानिक' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों और अन्य स्कूलों में 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने के इस सरकारी प्रयास का कड़ा विरोध होगा और उचित समय आने पर इसे हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी जाएगी।

VHP ने किया स्वागत, बंगाल के सीएम की तारीफ

एक तरफ CPI(M) इस फैसले का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने इसका जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने इसे छात्रों के बीच देशभक्ति और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। ANI से बातचीत में बंसल ने कहा, "इस्लामी चरमपंथियों और उनकी मानसिकता द्वारा 'वंदे मातरम' को लंबे समय तक दबाया गया था। पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और बाद में टीएमसी ने ऐसा किया।" हालांकि, उन्होंने मौजूदा आदेश के लिए बंगाल के सीएम की सराहना की, जिन्होंने इसे न केवल सरकारी स्कूलों बल्कि मदरसों में भी अनिवार्य कर दिया है ताकि सभी छात्र देशभक्ति के गहरे संदेश के साथ अपने दिन की शुरुआत करें।

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क्या है 14 मई का आधिकारिक आदेश?

पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग (प्रशासनिक शाखा, कोलकाता) द्वारा यह आधिकारिक आदेश 14 मई को जारी किया गया था। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के साथ लिया गया है। आदेश के मुताबिक, "सभी पिछले आदेशों और प्रथाओं को रद्द करते हुए, यह आदेश दिया जाता है कि राज्य भर में स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान 'वंदे मातरम' गाना तत्काल प्रभाव से अनिवार्य किया जाता है।" निर्देश में यह भी साफ किया गया है कि यह नियम स्कूल शिक्षा विभाग के दायरे में आने वाले सभी स्कूलों पर लागू होगा।