US Iran War Update Mojtaba Khamenei said Gulf countries will no longer be safe shield for US bases Donald Trump News ईरान के चक्कर में ट्रंप को लेने के देने पड़ जाएंगे? खामेनेई बोले- खाड़ी देशों में US बेस सुरक्षित नहीं रहेंगे, International Hindi News - Hindustan
More

ईरान के चक्कर में ट्रंप को लेने के देने पड़ जाएंगे? खामेनेई बोले- खाड़ी देशों में US बेस सुरक्षित नहीं रहेंगे

US Iran War Update: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने शांति वार्ता के बीच अमेरिका को खुली धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अब खाड़ी देश अमेरिकी बेसों के लिए ढाल का काम नहीं कर पाएंगे। अमेरिका को अब खाड़ी देश में रहकर आतंक फैलाने की छूट नहीं मिलेगी।

Tue, 26 May 2026 03:28 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
share
ईरान के चक्कर में ट्रंप को लेने के देने पड़ जाएंगे? खामेनेई बोले- खाड़ी देशों में US बेस सुरक्षित नहीं रहेंगे

पश्चिम एशिया में जारी संकट बुरी तरह से उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो किसी भी हाल में इस युद्ध को अमेरिका के लिए जीत साबित करने में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान है, जो अपने दशकों पुराने अमेरिकी डर का सामना करके और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है। इसी निडरता का परिचय देते हुए शांति समझौते के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि अब से खाड़ी देश अमेरिकी ठिकानों के लिए 'ढाल' की तरह काम नहीं कर पाएंगे।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-अल-अजहा के मौके पर खामेनेई ने ईरानी लोगों के लिए एक लिखित बयान जारी किया। इस बयान में खामेनेई ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर भी बात की। इतना ही नहीं युद्ध की स्थिति को लेकर उन्होंने साफ किया कि अब ईरान अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने से नहीं चूकेगा। उन्होंने कहा, “यह निश्चित है कि समय के हाथ अब पीछे की तरफ नहीं मुड़ेंगे और क्षेत्र की जनता और जमीन अब अमेरिकी ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेगी। अमेरिका को अब इस क्षेत्र में बुराई फैलाने या सैन्य अड्डा स्थापित करने का सुरक्षित आश्रय नहीं मिलेगा।” बता दें, खामेनेई का इशारा यहां पर युद्ध के समय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने को लेकर था। हालांकि, ईरान ने पिछले संघर्ष के समय भी इन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन उस वक्त सभी देशों ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जनवरी से बंद थी डिजिटल लाइफ, ईरान में अब इंटरनेट पर लगी रोक हटी; 87 दिनों बाद…
ये भी पढ़ें:'ईरान को पैसे भेजते हो?' मुस्लिम देश से रातों-रात निकाले जा रहे हजारों पाकिस्तान

इस बयान के साथ ही, खामेनेई ने संदेश दे दिया है कि ईरान अब खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा। वैसे भी खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा समझौता करने के बदले में वहां बेस बनाकर बैठे अमेरिका की पोल ईरान युद्ध के दौरान खुल गई थी। ईरान के हल्के ड्रोन्स ने सुरक्षित माने जाने वाले इन देशों में काफी उत्पात मचाया था, जिसकी वजह से यह देश पहले ही अमेरिका के अलावा दूसरे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं।

अमेरिका के साथ 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा ईरान

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी कि ईरान और अमेरिका के बीच में इस वक्त 14 सूत्रीय समझौते पर बातचीत जारी है। इसमें से ज्यादातर मुद्दों को हल कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी समझौता बहुत दूर है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स, उसमें शामिल होने से पाकिस्तान क्यों कर रहा मना?
ये भी पढ़ें:टैरिफ की मार, पाकिस्तान से नजदीकी; क्या भारत को ट्रंप पर दोबारा भरोसा करना चाहिए

वरिष्ठ ईरानी राजनयिक होसैन नूशाबादी के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच में ज्यादातर मामलों में समझौता हो सकता है, लेकिन केवल परमाणु का मुद्दा फंसा हुआ है। अमेरिका इस बात को बार-बार कहता आ रहा है कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका का सौंपना होगा, इसके साथ ही उसे इस बात की भी पुष्टि करनी होगी कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु कार्यक्रम शुरू नहीं करेगा। इसके अलावा तेहरान केवल एक परमाणु रिएक्टर बना सकता है। इसके साथ ही उसे अपने मिसाइल कार्यक्रम को भी बंद करना होगा। दरअसल, ट्रंप की मजबूरी यह है कि उन्हें ओबामा से बेहतर ईरानी डील करनी ही होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी हार साबित होगी। इसलिए ट्रंप भी इस पर झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखे पोस्ट में साफ किया कि ईरान के साथ अगर डील होगी, तो वह बेहतर होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर कोई भी डील नहीं होगी।

अमेरिका भले ही इन शर्तों के साथ आगे बढ़ रहा हो, लेकिन ईरान के लिए यह शर्तें स्वीकार करने योग्य नहीं है। दूसरी बात, दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना करने वाले ईरान के नेता अब निर्भीकता के साथ अमेरिका का सामना कर रहे हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि डोनाल्ड ट्रंप भी अब युद्ध नहीं चाहते, ऐसे में अब तेहरान भी बातचीत की टेबल पर सख्ती के साथ अपनी शर्तें रख रहा है।