UGC Rules Stay by Supreme Court CJI Surya Kant Big Statement Says For God Sake Dont do this भगवान के लिए ऐसा मत करो, UGC नियमों पर रोक लगाते हुए CJI सूर्यकांत ने कह दी बड़ी बात, India News in Hindi - Hindustan
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भगवान के लिए ऐसा मत करो, UGC नियमों पर रोक लगाते हुए CJI सूर्यकांत ने कह दी बड़ी बात

सीजेआई सूर्यकांत ने यूजीसी नियमों में अलग-अलग जातियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल के रूप में प्रस्तावित प्रावधान पर भी सवाल खड़े किए। और कहा कि भगवान के लिए ऐसा मत करो, हम सब एक साथ रहते थे।

Thu, 29 Jan 2026 06:16 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भगवान के लिए ऐसा मत करो, UGC नियमों पर रोक लगाते हुए CJI सूर्यकांत ने कह दी बड़ी बात

देशभर में सवर्णों के हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए यूजीसी नियमों पर रोक लगा दी। यूपी समेत कई राज्यों में सवर्णों ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन) रेग्युलेशन, 2026 नियमों का जोरदार विरोध किया है, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगाते हुए कहा है कि फिलहाल 2012 के नियम लागू रहेंगे। सीजेआई सूर्यकांत ने नए नियमों में अलग-अलग जातियों के स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग हॉस्टल के प्रावधान का भी जिक्र किया और कहा कि भगवान के लिए ऐसा मत करो। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम के 3 (सी) (जो जाति-आधारित भेदभाव को परिभाषित करता है) पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी भाषा को फिर से बदलने की जरूरत है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है।

कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए नए नियमों के तहत, संस्थानों को शिकायतें सुनने के लिए खास कमेटियां और हेल्पलाइन बनानी होंगी, खासकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी के छात्रों की शिकायतों के लिए। यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को नोटिफाई किए गए नए नियम, जो इसी विषय पर 2012 के नियमों को अपडेट करते हैं, ने जनरल कास्ट के छात्रों में बड़े पैमाने पर नाराजगी पैदा कर दी है, जिसके चलते जगह-जगह विरोध हो रहा और कई भाजपा नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया।

मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ''जातिविहीन समाज बनाने के मामले में हमने जो कुछ भी हासिल किया है, क्या अब हम पीछे जा रहे हैं? शेड्यूल कास्ट में ऐसे लोग भी हैं, जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो गए हैं।'' उन्होंने नियमों में अलग-अलग जातियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल के रूप में प्रस्तावित प्रावधान पर भी सवाल खड़े किए। और कहा कि भगवान के लिए ऐसा मत करो, हम सब एक साथ रहते थे। अंतर-जातीय विवाह भी होते थे। इस दौरान, जस्टिस बागची ने भी कहा कि भारत में एकता शिक्षण संस्थानों में दिखनी चाहिए।

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केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी

सीजेआई ने नियमों को अस्पष्ट बताया। उन्होंने कहा, ''पहली नजर में नियमों की भाषा पूरी तरह से अस्पष्ट है। इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। कोई एक्सपर्ट रीमॉडलिंग की सलाह दे सकता है।'' केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुझाव दिया कि इन नियमों पर जाने-माने कानूनी विशेषज्ञों की एक कमेटी द्वारा फिर से विचार किया जाना चाहिए। बेंच ने कहा, "नोटिस जारी करें, जिसका जवाब 19 मार्च को देना है। सॉलिसिटर जनरल नोटिस स्वीकार करते हैं। इस बीच, UGC रेगुलेशन 2026 लागू नहीं रहेंगे और 2012 के रेगुलेशन जारी रहेंगे।"