1961 से है ये संस्था, अब क्यों टूटी आपकी नींद? SC/ST आरक्षण मांगने पर क्यों भड़क उठे CJI सूर्यकांत
CJI सूर्यकांत ने कहा कि आप (SC/ST) हर जगह हैं। न्यायपालिका में हैं, वकीलों के बीच हैं, संसद में भी हैं...और जब बार काउंसिल 1961 से अस्तित्व में है, तो तब से लेकर अब तक आपने कुछ क्यों नहीं किया या ऐसी मांग क्यों नहीं उठाई?

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आज (मंगलवार, 27 जनवरी को) एक ऐसी याचिका सुनवाई के लिए आई, जिसमें देशभर के स्टेट बार काउंसिल्स में SC/ST वकीलों के लिए आरक्षण की मांग की गई थी। राम कुमार गौतम बनाम भारत संघ के मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने SC/ST के वकीलों को आरक्षण देने की मांग करते हुए CJI के सामने दलील दी कि जब बार काउंसिल में महिला वकीलों को आरक्षण दिया जा सकता है तो SC/ST समुदाय को क्यों नहीं? उन्होंने ये भी कहा कि जब कानून इस बारे में चुप था, तब भी बार काउंसिल्स में महिला वकीलों को आरक्षण दिया गया, इसलिए हमारी याचिका पर भी विचार किया जाए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, "आप हर जगह हैं। न्यायपालिका में हैं, वकीलों के बीच हैं, संसद में भी हैं...और जब बार काउंसिल 1961 से अस्तित्व में है, तो तब से लेकर अब तक आपने कुछ क्यों नहीं किया या ऐसी मांग क्यों नहीं उठाई? सिर्फ इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने अब महिलाओं के लिए कुछ किया है, तो आप भी अब जाग गए हैं! आप बस सब कुछ थाली में सजाकर चाहते हैं!" इसके आगे CJI ने कहा, “महिलाओं ने पिछले दो सालों से हमारी कोर्ट में लड़ाई शुरू की। आखिरकार वे सफल हुईं। हमने भी महिला प्रतिनिधित्व शब्द का इस्तेमाल किया, आरक्षण का नहीं। आप भी अधिकारियों से संपर्क करें और फिर यहां आएं।”
चुनाव घोषणा होने के बाद दायर की गई अर्जी
CJI सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि यह याचिका स्टेट बार काउंसिल चुनाव की घोषणा होने के बाद दायर की गई है, और यह देखते हुए कि चल रहे चुनावों के लिए इस तरह का आरक्षण मांगना बहुत देर हो चुकी है, शीर्ष अदालत ने इस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया।
"आपने सोचा, हम दावा करेंगे और मिल जाएगा"
याचिकाकर्ता को झिड़की देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा, "हमने महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं दिया है... यह सिर्फ प्रतिनिधित्व है... आप तब कोर्ट आए हैं, जब चुनाव घोषित हो चुके हैं। आपने शायद यही सोचा होगा कि आप कुछ दावा करेंगे और जो महिला सदस्यों को दिया गया है, वह आपको भी मिल जाएगा। आप अगले चुनाव के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं।" CJI ने ये भी कहा, “आप हमारे पिछले आदेश का संदर्भ और प्रतिनिधित्व लें और अधिकारियों को दिखाएं। मुझे यकीन है कि वे इस पर विचार करेंगे, यह देखते हुए कि अब कितने सदस्य हैं.. लेकिन अगर आपको कोई जवाब नहीं मिलता है... तो फिर हम फैसला लेंगे।”

SC ने महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व देने का निर्देश दिया था
बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने ये भी कहा कि याचिकाकर्ता सक्षम अधिकारी से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है। हमें उम्मीद है कि उचित सक्षम अधिकारी इस पर विचार करेगा और फैसला लेगा। हमें उम्मीद है कि प्रतिनिधित्व अधिकारियों का पर्याप्त ध्यान आकर्षित करेगा। बता दें कि दिसंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का निर्देश दिया था और कहा था कि यह शर्त "नॉन-नेगोशिएबल" है और किसी भी कमी को को-ऑप्शन के जरिए पूरा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने बार काउंसिल चुनावों में खास तौर पर दिव्यांग वकीलों की ज़्यादा भागीदारी के उपायों का भी समर्थन किया है, जिसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ऐसे उम्मीदवारों के लिए नॉमिनेशन फीस कम करने पर सहमत हो गया।




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