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सनातन धर्म को बताया 'डेंगू', उदयनिधि स्टालिन को SC से तक लग चुकी है फटकार; फिर भी नहीं माने

सत्ता गंवाने और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में सीएम थलापति विजय के सामने सनातन धर्म पर फिर विवादित बयान दिया है। जानें इस हेट स्पीच पर बीजेपी का क्या है पलटवार और पूरी खबर।

Wed, 13 May 2026 08:55 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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सनातन धर्म को बताया 'डेंगू', उदयनिधि स्टालिन को SC से तक लग चुकी है फटकार; फिर भी नहीं माने

तमिलनाडु की राजनीति में 'सनातन धर्म' को लेकर विवाद एक बार फिर से गरमा गया है। पूर्व में सनातन धर्म की तुलना 'डेंगू, मलेरिया और कोरोना' जैसी बीमारियों से कर चुके द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पहले के भाषण को 'हेट स्पीच' करार दिया था। लेकिन 2026 विधानसभा चुनावों में सत्ता से बाहर होने के बावजूद, उदयनिधि अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने एक बार फिर सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही।

उदयनिधि स्टालिन का ताजा बयान

द्रमुक के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को दावा किया कि सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है और उन्होंने इसे 'समाप्त' करने का आह्वान किया। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि "लोगों को बांटने वाले सनातन धर्म का निश्चित रूप से उन्मूलन (समूल नाश) किया जाना चाहिए।"

खास बात यह है कि जब उदयनिधि यह बयान दे रहे थे, तब सदन में तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (थलापति विजय) भी उनके ठीक सामने मौजूद थे। विपक्ष के नेता के तौर पर अपने पहले ही भाषण में इस मुद्दे को उठाकर उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अपनी विचारधारा और पुराने रुख से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उदयनिधि इससे पहले सितंबर 2023 में भी इस तरह का बयान दे चुके हैं।

2023 का विवाद: डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की थी तुलना

इस पूरे विवाद की जड़ सितंबर 2023 से भी जुड़ी हैं। उस समय तमिलनाडु के युवा और खेल मामलों के मंत्री रहते हुए उदयनिधि ने 'तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स' के एक कार्यक्रम में कहा था कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। उन्होंने बेहद विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि, "सनातन धर्म मच्छर, डेंगू, मलेरिया या कोरोना की तरह है, जिसका केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए।" उनके इस बयान पर पूरे देश में भारी बवाल हुआ था। भाजपा, हिंदू संगठनों और कई व्यक्तियों ने इसे हिंदू धर्म पर हमला और नफरत फैलाने वाला बताया, जिसके चलते विभिन्न राज्यों (महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश आदि) में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुईं। लेकिन उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने से साफ इनकार करते हुए कहा था कि वे इसे कानूनी रूप से लड़ेंगे और अपनी बात पर कायम रहेंगे।

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कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की सख्त फटकार

उदयनिधि के 2023 वाले बयान को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जहां अदालतों ने उनके इस बयान को गंभीरता से लिया था। मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उदयनिधि को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि एक मंत्री होने के नाते उन्हें अपने शब्दों के परिणामों का अंदाजा होना चाहिए था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के तहत मिले अधिकारों का दुरुपयोग किया है। अदालत ने इसे आम आदमी के बयान से अलग और 'हेट स्पीच' के दायरे में रखते हुए कहा था- आप एक आम आदमी नहीं, बल्कि मंत्री हैं; आपको पता होना चाहिए कि इसके क्या परिणाम होंगे।

बता दें कि कई शिकायतकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं थीं, जिनमें उदयनिधि पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन ऐसी याचिकाओं को सुनने से इनकार कर दिया। हालांकि अन्य वैकल्पिक कानूनी उपायों की छूट दी। उधर, उदयनिधि स्टालिन ने खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सभी FIR को एक जगह करने और ट्रांसफर करने की मांग की। मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया कि उनके बयान पर कोई नई FIR बिना अदालत की अनुमति के दर्ज नहीं की जा सकेगी। साथ ही मौजूदा मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा भी दी गई। बाद में सुनवाई 2026 के लिए स्थगित हुई, जहां अंतिम फैसला लंबित है।

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भाजपा ने द्रमुक नेता पर तीखा हमला किया

इसी बीच, नवगठित तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान सनातन धर्म को "समाप्त करने" के आह्वान को दोहराने के बाद भाजपा ने द्रमुक नेता पर तीखा हमला किया। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने दावा किया कि द्रमुक का हाल में सत्ता से बेदखल होना इसी तरह की विभाजनकारी बयानबाजी का सीधा परिणाम है।

तिरुपति ने 'एक्स' पर चेतावनी दी कि अगर द्रमुक धार्मिक भावनाओं का अपमान करना जारी रखती है, तो तमिलनाडु की जनता उसे ''पूरी तरह से मिटा देगी।'' तिरुपति ने लिखा, "यह समझें कि सनातन धर्म को मिटाने की बात करने के कारण ही आज जनता ने आपको और द्रमुक को सत्ता से दूर कर दिया है और बाहर फेंक दिया है।'' यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव में द्रमुक की हार के बाद हुआ है। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है।

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