Two Arch Rivals DMK and AIADMK may tie up each other to Thwart Vijay TVK Secret talks spark buzz in Tamilnadu तमिलनाडु में दो धुर विरोधी DMK-AIADMK मिल रहे चुपके-चुपके? विजय को रोकने पका रहे नई खिचड़ी, अटकलें तेज, India News in Hindi - Hindustan
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तमिलनाडु में दो धुर विरोधी DMK-AIADMK मिल रहे चुपके-चुपके? विजय को रोकने पका रहे नई खिचड़ी, अटकलें तेज

DMK to tie up with AIADMK: DMK और AIADMK अगर हाथ मिला लें, तब भी उनके पास सिर्फ 106 विधायक ही होंगे जो सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या से कम है। 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है।

Wed, 6 May 2026 10:40 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
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तमिलनाडु में दो धुर विरोधी DMK-AIADMK मिल रहे चुपके-चुपके? विजय को रोकने पका रहे नई खिचड़ी, अटकलें तेज

DMK to tie up with AIADMK: तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी नई नवेली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के नेता थलापति विजय के 7 मई को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह पर बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल, राज्य के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर विजय के उस दावे से संतुष्ट नहीं हैं कि उनके पक्ष में जरूरी बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन हासिल है। विजय ने 7 मई को ही शपथ ग्रहण करने का अनुरोध भी किया था लेकिन गवर्नर से हरी झंडी नहीं मिल पाने के कारण उनका शपथ ग्रहण टल गया है।

दूसरी, तरफ राज्य में नए राजनीतिक गठबंधन आकार लेने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चेन्नई के सियासी गलियारों में ऐसी चर्चा है कि राज्य की दो धुर विरोधी पार्टियां DMK और AIADMK अंदरखाने सरकार बनाने पर बात कर रही हैं। सूत्रों ने बताया है कि दोनों विरोधी दलों के नेता इस मसले पर गुपचुप बात कर रहे हैं। बहरहाल, इंडिया टुडे से AIADMK के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों धुर विरोधी दलों के नेताओं के बीच बातचीत हुई है। हालांकि बातचीत अभी तक किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच सकी है।

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यह इतिहास दोहराने जैसा होगा

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय की गाड़ी को रोकने के लिए DMK इस गठबंधन में शामिल होने को तैयार है? अगर ऐसा होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक अभूतपूर्व बदलाव होगा। 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में DMK को 59 सीटें मिलीं, जबकि AIADMK 47 सीटें जीतने में कामयाब रही। अगर दोनों विरोधी दल एक होते हैं तो यह इतिहास दोहराने जैसा होगा। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी अलग-अलग विचारधारा वाली दो धुर विरोधी पार्टियों ने गठबंधन कर सरकार बनाई थी। इसके बाद महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे की अगुवाई में शिवसेना और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी। जानकार कहते हैं कि राजनीति संभावनाओं का खेल है, इसलिए किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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नई सियासी खिचड़ी में भी एक झोल भी

हालांकि, इस नई सियासी खिचड़ी में भी एक झोल है। दरअसल, DMK और AIADMK अगर हाथ मिला लें, तब भी उनके पास सिर्फ 106 विधायक ही होंगे जो सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या से कम है। 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। इसलिए, अगर गठबंधन की ये बातचीत सफल होती है, तो दोनों पार्टियों को समर्थन के लिए छोटी पार्टियों की जरूरत पड़ेगी। इस संभावना को छोटे-छोटे दलों ने भी संजीवनी दी है। जहां AIADMK महासचिव ई पलानीस्वामी (EPS) ने विजय का साथ देने से इनकार किया है, वहीं DMK के सहयोगी दल वीसीके ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। VCK के पास दो विधायक हैं। चर्चा यह भी है कि AIADMK के 47 में से 30 विधायकों ने विजय का साथ देने की इच्छा जताई है लेकिन EPS ने ऐसा करने से मना कर दिया है।

वाम दलों और IUML का TVK को समर्थन से इनकार

दूसरी तरफ, टीवीके के आमंत्रण के बावजूद वाम दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने विजय की पार्टी को समर्थन देने से इनकार कर दिया है। इन दलों के पास कुल 6 विधायक हैं। विजय के नेतृत्व वाली TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करके 108 सीट हासिल की। हालांकि, सरकार बनाने के लिए उसे 10 और सीटों की जरूरत है। पांच सीटों वाली कांग्रेस ने DMK से दोस्ती तोड़ TVK को सशर्त समर्थन दिया है। इस बीच, तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने बुधवार को राज्य की 16वीं विधानसभा भंग कर दी है।

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54 साल पहले कैसे बंटी थी DMK

बता दें कि AIADMK का गठन 1972 में हुआ था। उस समय DMK के तत्कालीन अध्यक्ष एम. करुणानिधि ने पार्टी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हुए विवादों के चलते एम.जी. रामचंद्रन (MGR) को पार्टी से निकाल दिया था। तब MGR ने AIADMK बनाई थी। इस विभाजन ने इन दोनों द्रविड़ पार्टियों के बीच दशकों तक चलने वाली प्रतिद्वंद्विता की नींव रखी थी, जिसने तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया। ये सियासी दुश्मनी अब तक जारी है। इसका आलम यह है कि ये ही दोनों दल राज्य की सत्ता पर काबिज रहे हैं लेकिन जैसे ही तीसरे ने एंट्री ली और सरकार बनाने तक जा पहुंचा, तब ये दोनों द्रविड़ पार्टियां 54 साल पुरानी गहरे जख्म को भुलाने पर बात कर रहे हैं।