तृषा कृष्णन बन सकती हैं तमिलनाडु की सीएम? जता चुकी हैं इच्छा, विजय से कैसा रिश्ता
विजय के तमिलनाडु के सीएम बनने के बाद तृषा कृष्णन का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? जानिए 3 बड़े कारण क्यों तृषा का दूसरी 'जयललिता' बनने का सपना और विजय के साथ उनका अनकहा रिश्ता, सत्ता की राह में सबसे बड़ी रुकावट है।

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा की दुनिया में इस समय एक बड़ी चर्चा चल रही है। अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लोग अगली मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे हैं। पुरानी क्लिप वायरल हो रही है और जयललिता से तुलना हो रही है। दरअसल तृषा कृष्णन पिछले दो दशकों से दक्षिण भारतीय सिनेमा, खासकर तमिल फिल्म इंडस्ट्री पर राज कर रही हैं। तमिलनाडु का इतिहास रहा है कि वहां की जनता ने फिल्मी सितारों को सिर-आंखों पर बिठाया है और उन्हें सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया है। इनमें MGR और जयललिता के बाद अब विजय थलापति का नाम सबसे आगे है।
अचानक क्यों हो रही तृषा कृष्णन और सीएम बनने की चर्चा?
हाल ही में अभिनेता थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिलागा वेट्री कझगम) ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में बड़ी सफलता हासिल की। विजय मुख्यमंत्री बन गए हैं। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में तृषा कृष्णन भी पहुंचीं। उन्होंने विजय को बधाई दी और कुछ पोस्ट भी किए। इससे अफवाहें तेज हो गईं। अब पुरानी 2004 की एक क्लिप वायरल हो रही है। उसमें युवा तृषा कृष्णन हंसते हुए कहती हैं- मैं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनना चाहती हूं। इंतजार कीजिए, अगले 10 साल में मैं यह हासिल कर लूंगी! जब उनसे पूछा गया कि CM बनकर क्या करेंगी, तो बोलीं- पहले मुझे वोट देकर जिताओ, फिर बताऊंगी! यह क्लिप 20 साल पुरानी है, लेकिन अब लोग इसे गंभीरता से ले रहे हैं।
कैसे सीएम बन सकती हैं तृषा कृष्णन?
पहला सिनेरियो- विजय को कर सकती हैं रिप्लेस? राजनीति में किसी भी बड़े बदलाव के लिए एक भरोसेमंद और लोकप्रिय चेहरे की जरूरत होती है। अगर तृषा कृष्णन TVK में शामिल होती हैं, तो वे पार्टी की बहुत बड़ी चेहरा बन सकती हैं। उनकी लोकप्रियता, साफ इमेज और महिलाओं-युवाओं पर असर के कारण वे अच्छी कैंपेनर बनेंगी। 5-10 साल में वे विजय की उत्तराधिकारी या बड़ी नेता बन सकती हैं- ठीक जयललिता की तरह, जो MGR के बाद आईं। हालांकि विजय अभी 51 साल के हैं जबकि तृषा 43 साल की हैं।
दूसरा सिनेरियो: मुख्य विपक्षी दल (AIADMK) का नेतृत्व
जयललिता के निधन के बाद से ही तमिलनाडु की राजनीति में एक मजबूत महिला नेता का स्थान खाली है। अगर तृषा कृष्णन मुख्य विपक्षी दल का हिस्सा बनती हैं, तो वह इस खालीपन को भर सकती हैं। उनकी लोकप्रियता एआईएडीएमके के कैडर को फिर से एकजुट करने और पार्टी को नई ऊर्जा देने का काम कर सकती है, जो उन्हें सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना देगा।
तीसरा सिनेरियो: अपनी नई राजनीतिक पार्टी का गठन
दक्षिण भारत में फिल्मी सितारों का अपनी अलग पार्टी बनाना और सत्ता के शिखर तक पहुंचना कोई नई बात नहीं है। इस बात की भी प्रबल संभावना है कि तृषा कृष्णन एक स्वतंत्र नेता के तौर पर मैदान में उतरें। महिलाओं और युवाओं के बीच अपनी भारी लोकप्रियता के दम पर वह खुद की पार्टी बनाकर सत्ता के समीकरण बदल सकती हैं।
तृषा कृष्णन और जयललिता की तुलना क्यों?
जयललिता की तरह तृषा कृष्णन भी साउथ की लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। तृषा कृष्णन ने विजय के साथ कई हिट फिल्में की हैं जैसे घिल्ली, थिरुपाची आदि, ठीक वैसे ही जैसे जयललिता ने MGR के साथ काम किया था। दोनों की पब्लिक इमेज अच्छी है- सुंदर, स्मार्ट और मजबूत। सोशल मीडिया पर मीम्स, वीडियो और तुलनाएं बन रही हैं। लोग कह रहे हैं कि अगर विजय MGR जैसे हैं, तो तृषा कृष्णन जयललिता जैसी हो सकती हैं।
क्या यह सच में हो सकता है?
नजदीकी भविष्य में यह मुश्किल लग रहा है। इसकी भी अपनी वजह हैं। पर्दे पर तृषा कृष्णन और 'थलापति' विजय की जोड़ी जितनी सुपरहिट रही है, असल जिंदगी में उनके 'अनकहे रिश्ते' को लेकर उतनी ही अफवाहें और चर्चाएं भी रही हैं। तृषा और विजय ने सबसे पहले घिल्ली (2004) फिल्म में साथ काम किया। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी जबरदस्त थी कि लोग उन्हें रियल लाइफ में भी जोड़ने लगे। इसके बाद थिरुपाची, आथि, कुरुवी जैसी फिल्मों में भी दोनों साथ नजर आए। कुरुवी (2008) के बाद अचानक दोनों ने साथ काम करना लगभग बंद कर दिया। अफवाहें थीं कि विजय के परिवार (खासकर पत्नी) ने उन्हें तृषा से दूरी बनाने को कहा। लोगों का कहना है कि दोस्ती धीरे-धीरे और करीब आई, लेकिन 15 साल तक दोनों ने साथ फिल्में नहीं कीं। 2023 में लियो फिल्म में दोनों फिर साथ आए। इसके बाद त्रिशा ने विजय को “स्पेशल” और “घर जैसा” बताया।
2026 में विजय की पत्नी संगीता सोर्नलिंगम ने तलाक की अर्जी दी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि विजय एक अभिनेत्री के साथ 'रिश्ते' में हैं। नाम नहीं लिया गया, लेकिन ज्यादातर लोग और मीडिया इसे तृषा से जोड़ रहे हैं। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में उनकी पत्नी और बच्चे नहीं आए, लेकिन तृषा पहुंचीं। उनकी इमोशनल रिएक्शन और रोमांटिक सॉन्ग वाली पोस्ट वायरल हो गई। दोनों एक शादी में मैचिंग आउटफिट में साथ नजर आए, जिससे अफवाहें और बढ़ीं। तृषा ने पहले एक बिजनेसमैन वरुण मणियन से सगाई तोड़ी थी। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि विजय से जुड़ी अफवाहों का उस पर भी असर पड़ा। विजय अभी-अभी मुख्यमंत्री बने हैं। अगर उनकी पत्नी के तलाक के केस में तृषा का नाम जुड़ा रहा है, तो तृषा को TVK में बड़ी भूमिका या उत्तराधिकारी बनाना विवादास्पद हो जाएगा। तमिलनाडु में परिवार-मूल्यों को बहुत महत्व दिया जाता है।
अगर तृषा के राजनीतिक भविष्य और मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं का यथार्थवादी विश्लेषण किया जाए, तो विजय के साथ जुड़ा उनका नाम इस सपने को लगभग असंभव बना देता है। सबसे बड़ा और सीधा कारण यह है कि विजय खुद अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) की जीत के साथ मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
जयललिता वाली थ्योरी अब बेकार? या नहीं....
जयललिता तब सुप्रीम लीडर और मुख्यमंत्री बनी थीं, जब MGR का राजनीतिक युग ढलान पर था या उनके निधन के बाद पार्टी को एक चेहरे की जरूरत थी। लेकिन यहां कहानी बिल्कुल उलटी है। विजय अभी युवा हैं और उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत ही सीधे 'मुख्यमंत्री' बनकर की है। तृषा के पास अब विजय के समानांतर अपनी स्वतंत्र 'सुप्रीमो' वाली जगह बनाने का कोई स्कोप ही नहीं बचा है।
चूंकि विजय अब विपक्ष (DMK/AIADMK) नहीं, बल्कि खुद सरकार हैं, इसलिए उन पर होने वाला हर हमला सीधे सरकार पर हमला होगा। अगर तृषा राजनीति में कदम रखती हैं, तो उनके और विजय के बीच के तथाकथित 'रिश्ते' की अफवाहों को विपक्ष सबसे बड़ा हथियार बनाएगा। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की 'पारिवारिक और नैतिक छवि' बहुत मायने रखती है। विजय कभी नहीं चाहेंगे कि इस तरह के विवाद उनके नए-नए बने राजनीतिक करियर और सीएम पद पर कोई दाग लगाएं।




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