TMC हारी पर इस नेता पर ममता बनर्जी को भरोसा, दोबारा पद दिया; भतीजे अभिषेक को क्या मिला
राजनीतिक पर्यवेक्षक तृणमूल कांग्रेस पार्टी के इस कदम को महज एक सामान्य फेरबदल से कहीं अधिक मान रहे हैं। हाल के महीनों में, कल्याण बनर्जी तृणमूल के सबसे प्रमुख कानूनी और राजनीतिक चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं।

पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवा चुकी तृणमूल कांग्रेस ने वफादारी और राजनीतिक ताकत के महत्व देने का संदेश देते हुए पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर कल्याण बनर्जी को लोकसभा में दल का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया। कल्याण को पार्टी के आंतरिक उथल-पुथल के बीच लोकसभा में तृणमूल के मुख्य सचेतक के पद से हटा दिया गया था। हालांकि, अब पार्टी ने अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौर में कल्याण पर भरोसा किया है।
तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित आवास पर हुई बैठक के बाद कल्याण को मुख्य सचेतक बनाने की घोषणा की। उनका यह कदम पार्टी सांसदों से एकजुट रहने की अपील के बीच आया है। तृणमूल के सभी सांसद इस बैठक में मौजूद रहे। यह बैठक समीक्षा, मनोबल बढ़ाने और राजनीतिक संदेश देने के लिए आयोजित की गई थी।
अभिषेक बनर्जी को क्या जिम्मेदारी
ममता बनर्जी ने लोकसभा में पार्टी के नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी और उपनेता के रूप में शताब्दी रॉय को बरकरार रखा। इसी के साथ सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक परिवर्तन करते हुए कल्याण बनर्जी को उस पद पर बहाल किया, जिसे उन्होंने (कल्याण ने) पिछले साल अगस्त में कृष्णानगर से लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा के साथ सार्वजनिक विवाद के दौरान छोड़ दिया था।
क्यों अहम है फैसला
राजनीतिक पर्यवेक्षक पार्टी के इस कदम को महज एक सामान्य फेरबदल से कहीं अधिक मान रहे हैं। हाल के महीनों में, कल्याण बनर्जी तृणमूल के सबसे प्रमुख कानूनी और राजनीतिक चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं। उन्होंने चुनावों के आसपास की राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अदालती लड़ाइयों और सार्वजनिक टकरावों में आक्रामक भूमिका निभाई है।
पार्टी ने हालांकि इस बदलाव का कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया, लेकिन कई सांसदों ने निजी तौर पर कहा कि अदालतों में पुरजोर तरीके से पार्टी का रखने और राजनीतिक मोर्चे पर मुखर जवाब देने की वजह से कल्याण को यह मुकाम मिला है। तृणमूल के एक वरिष्ठ सांसद ने बैठक के बाद कहा, 'नेतृत्व उन लोगों को महत्व देता है जो कठिन समय में खड़े होकर संघर्ष करते हैं।' राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस निर्णय में एक और संदेश भी शामिल है कि विधानसभा स्तर पर प्रदर्शन संसदीय जिम्मेदारियों को सौंपने का मापदंड नहीं है।
टीएमसी की हुई थी हार
श्रीरामपुर और बारासात लोकसभा क्षेत्रों के तहत आने वाले इलाकों में तृणमूल को विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां भाजपा ने दोनों निर्वाचन क्षेत्रों की सात में से पांच सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि, जीत कल्याण को मिली, न कि काकोली को।
पार्टी के सूत्रों ने भी आंतरिक समीकरणों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि कल्याण के बेटे शिरसन्या बनर्जी उत्तरपाड़ा से चुनावी हार के बावजूद राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे और पार्टी नेतृत्व के साथ संवाद बनाए रखा। जबकि काकोली के बेटे द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं, जिससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ी और एक धड़ा इसे पूरे घटनाक्रम से कथित तौर पर नाखुश था।
कल्याण बनर्जी की तारीफ भी की
खबरों के अनुसार, ममता बनर्जी ने बैठक के दौरान कल्याण की भूमिका की सराहना की और सांसदों से अपने निर्वाचन क्षेत्रों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने और स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय स्थापित करने का आग्रह किया। इस बैठक में पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिया कि वह चुनावी नतीजों को सीधे तौर पर स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
क्या बोले अभिषेक बनर्जी
सांसदों को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल ने न केवल भाजपा से लड़ाई लड़ी बल्कि उसने हराने के लिए लाई गई 'पूरे देश की ताकत' का भी सामना किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अभिषेक ने कहा, 'हमने एक कठिन चुनाव लड़ा। हमने SIR पर बहुत मेहनत की। हमने सिर्फ भाजपा से ही नहीं, बल्कि भाजपा द्वारा हमें हराने के लिए लाए गए पूरे तंत्र से लड़ाई लड़ी।'
उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कर्मियों ने मतगणना केंद्रों से मतगणना एजेंटों को हटा दिया, पहचान पत्र छीन लिए गए और मोबाइल फोन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह की घटनाएं भवानीपुर और अन्य जगहों पर भी हुईं।
अभिषेक ने ईवीएम के आंकड़ों और फॉर्म 17सी के डेटा के बीच विसंगतियों का भी आरोप लगाया और दावा किया कि पार्टी ने मतगणना केंद्रों से सीसीटीवी फुटेज की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक मतगणना के बाद भाजपा को 200 सीटों का आंकड़ा पार करते हुए दिखाने वाले टेलीविजन प्रसारण तृणमूल कार्यकर्ताओं और एजेंटों का मनोबल गिराने के उद्देश्य से किए गए थे।
सूत्रों ने बताया कि तृणमूल नेतृत्व ने बंगाल से संबंधित मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन INDIA यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस के सहयोगियों के समक्ष उठाने पर भी चर्चा की। बैठक में मौजूद जयनगर की सांसद प्रतिमा मंडल ने कथित तौर पर कहा कि चुनावी हार के बाद वह विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करना चाहती थीं, लेकिन स्थानीय नेताओं ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी।
तृणमूल सांसद सायनी घोष ने बाद में संवाददाताओं के सामने चुनौती भरा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'तृणमूल डरने वालों या पीछे हटने वालों में से नहीं है। ममता बनर्जी शेरनी हैं, जुझारू हैं - पहले भी थीं और आगे भी रहेंगी। यह वोट जनता का जनादेश नहीं है। पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी की सरकार को हटाना नहीं चाहती थी।'




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