Mamata Banerjee lost the election which is why she rushed to court a former Supreme Court judge said ममता बनर्जी चुनाव हारीं इसलिए चिल्लाने अदालत पहुंच गईं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हुए नाराज, India News in Hindi - Hindustan
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ममता बनर्जी चुनाव हारीं इसलिए चिल्लाने अदालत पहुंच गईं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हुए नाराज

दरअसल, कोई भी व्यक्ति, जो संवैधानिक पद पर है या लाभकारी रूप से नियोजित है, उसे अपना बार लाइसेंस सेवा के दौरान निलंबित करवाना पड़ता है और फिर से वकालत करने के लिए इसे दोबारा चालू कराना होता है। BCI ने जवाब तलब किया है।

Fri, 15 May 2026 07:12 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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ममता बनर्जी चुनाव हारीं इसलिए चिल्लाने अदालत पहुंच गईं, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हुए नाराज

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काला कोट पहनकर कोर्ट जाने को लेकर बवाल छिड़ गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने आरोप लगाए हैं कि बनर्जी ने सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत को चुना है। साथ ही उन्होंने कहा है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद वह ऐसा कर रहीं हैं। इधर, BCI यानी भारतीय विधिज्ञ परिषद ने भी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख से जवाब तलब किया है।

जस्टिस काटजू ने लिखा, 'ममता बनर्जी हाई कोर्ट क्यों गईं? जाहिर है क्योंकि वह अपना खुद का चुनाव हार गई हैं और इसलिए वह विधानसभा में चिल्ला नहीं सकतीं। लेकिन उनके पास ऐसी जगह होनी चाहिए जहां वह चिल्ला सकें, ताकि उन्हें पब्लिसिटी मिले और वह सुर्खियों में बनी रहें। इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट को चुना है।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'ममता बनर्जी ने तो हद कर दी थी।'

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ममता बनर्जी काले कोट में कोर्ट पहुंचीं

बनर्जी गुरुवार को वकील का गाउन पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची। बनर्जी ने चुनाव के बाद कथित हिंसा और पार्टी दफ्तरों पर हमलों के मामले में अपनी दलील में कहा कि ‘बंगाल कोई बुल्डोजर राज्य नहीं है। अदालत से बाहर निकलते समय कुछ लोगों ने ममता के खिलाफ नारे भी लगाए। मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया।

बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी थे। यह मामला टीएमसी की ओर से वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय की दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमलों और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है।

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BCI ने मांगा जवाब

BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से बनर्जी के पंजीकरण और पेशेवर वकालत की स्थिति के संबंध में 48 घंटों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा। दरअसल, कोई भी व्यक्ति, जो संवैधानिक पद पर है या लाभकारी रूप से नियोजित है, उसे अपना बार लाइसेंस सेवा के दौरान निलंबित करवाना पड़ता है और फिर से वकालत करने के लिए इसे दोबारा चालू कराना होता है।

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पत्र में कहा गया है, 'ममता बनर्जी ने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उक्त अवधि के दौरान उनके संवैधानिक सार्वजनिक पद को ध्यान में रखते हुए और इस समय पर इस बात पर कोई राय व्यक्त किए बिना कि ऐसी उपस्थिति की अनुमति है या नहीं, बीसीआई को उनके पंजीकरण, वकालत, निलंबन और दोबारा प्रारंभ की तथ्यात्मक स्थिति आपके रिकॉर्ड से सत्यापित करने की आवश्यकता है।' बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से बनर्जी की पंजीकरण संख्या और राज्य बार काउंसिल में उनके नामांकन की तारीख भी बताने को कहा है।