संकट के बीच ममता बनर्जी के लिए गुड न्यूज, 20 बागी सांसदों वाला दावा साबित हो गया झूठा?
इस बीच टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद, इस हफ्ते पार्टी छोड़ने वाले बराइक तीसरे टीएमसी सांसद हैं।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। पार्टी के 50 से अधिक विधायकों के बाद अब सांसदों ने भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। टीएमसी से बागी हुईं काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि पार्टी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA को समर्थन देने की बात कही है। इस संकट की घड़ी में एक ऐसी खबर आई है जो ममता बनर्जी को राहत दे सकती है। दरअसल 20 बागी सांसदों के लिस्ट में शामिल टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने गुरुवार को कहा है कि उन्होंने ऐसे किसी भी दस्तावेज पर साइन नहीं किए हैं।
जयनगर से टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने बागी गुट के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एनडीए को समर्थन वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर होने की खबरों को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए बागी धड़े को खुली चुनौती दी है। उनके नाम का इस्तेमाल किए जाने से नाराज सांसद प्रतिमा मंडल ने कोलकाता में एएनआई से बातचीत में कहा, "यह एक झूठी खबर है। मुझे यहां के लोगों ने चुनकर आशीर्वाद दिया है।… मैं 4 तारीख के बाद दिल्ली नहीं गई, यहां कोलकाता में ही हूं।”
बागी गुट को चुनौती
उन्होंने बागी गुट को चुनौती देते हुए कहा, “जो लोग ये झूठी खबर फैला रहे हैं, अगर आपके पास 20 सांसद हैं और यह खबर पिछले 2-3 दिनों से चल रही है, तो मैं बोलना चाहती हूं कि सभी सांसदों के सिग्नेचर वाला लेटर मीडिया में क्यों नहीं दिखाते रहे हैं? क्यों उस लेटर को दिखाकर साबित नहीं कर रहे कि उसमें मेरा नाम है या नहीं। मेरे लोगों को धोखा मत दीजिए।… मैं लोगों के जनादेश का सम्मान करती हूं और 2029 तक यहीं रहूंगी।”
इस बीच बागी गुट में नाम शामिल होने की चर्चाओं के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने भी मुश्किल वक्त में ममता बनर्जी का साथ ना छोड़ने की बात कही है। आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि कहा है कि उनके मुश्किल समय में ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी रहीं। इसीलिए उनका कर्तव्य है कि वे अब ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़े रहें।
क्या है काकोली घोष का दावा?
गौरतलब है कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी गुट को कम से कम दो-तिहाई यानी 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। बागी गुट की अगुवाई कर रही काकोली घोष का दावा है कि 20 सांसद उनके साथ हैं। उन्होंने दावा किया है कि 18 सांसदों ने खुद आकर और 2 सांसदों ने ऑनलाइन लेटर पर साइन किए हैं। दावा सच हुआ तो बागी गुट टीएमसी के नाम और सिंबल पर दावा भी ठोंक सकती है।
राज्यसभा को ममता को झटका
इस बीच गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बराइक ने सांसदी के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा को जो जनादेश दिया है, उसे देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के बाद, इस हफ्ते पार्टी छोड़ने वाले बराइक तीसरे टीएमसी सांसद हैं। इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे के आवास के बाहर पत्रकारों से बातचीत में बराइक ने कहा, “पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया है। तृणमूल कांग्रेस को जनता का समर्थन नहीं मिला। पश्चिम बंगाल के लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए मैं पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं।”
इससे पहले सोमवार को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के अपने फैसले की भी घोषणा की थी। वहीं बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी संसद की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की, जिससे उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गईं। इस बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को यादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी बागी सांसदों के गुट में शामिल हो गईं।




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