सायोनी घोष कोलकाता से निकलीं, कल्याण बनर्जी भी हुए बागी; TMC में अब कितने लोग बाकी
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस गहरे आंतरिक संकट का सामना कर रही है। वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे, विधायकों और सांसदों के बीच बागी गुटों का उभरना, कांग्रेस के साथ विलय की अटकलें पार्टी की एकता और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी उथल-पुथल मचा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। विधायकों और सांसदों के बीच बागी गुट तैयार हो चुके हैं। कांग्रेस के साथ विलय की अटकलें भी तेज हो चुकी हैं। इन घटनाओं ने पार्टी की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सबके बीच चर्चा यह भी बै कि ममता बनर्जी को अपना आदर्श बताने वाली सायोनी घोष भी कोलकाता से बाहर निकल गई हैं। उनके भी टीएमसी के बागी कैंप में शामिल होने की चर्चा है। उनके अलावा एक और करीबी नेता कल्याण बनर्जी ने बागी तेवर दिखला दिए हैं।
टीएमसी में फूट का पहला बड़ा संकेत पश्चिम बंगाल विधानसभा में मिला, जहां स्पीकर रथिंद्र नाथ बोस ने पिछले हफ्ते ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 बागी TMC विधायकों को मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर मान्यता दी। यह उथल-पुथल अब सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं है। TMC सांसदों के बीच भी एक अलग गुट उभरकर सामने आया है। बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पिछले हफ्ते पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें लगभग 20 सांसदों का समर्थन हासिल है और यह समूह BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने को तैयार है।
बागी खेमे में कई बड़े नाम शामिल
असंतुष्ट समूह सिर्फ कम चर्चित विधायकों तक सीमित नहीं है। बागी खेमे में कई हाई-प्रोफाइल नेता शामिल हैं। जादवपुर की सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण की सांसद माला रॉय बुधवार को असंतुष्टों के साथ जुड़ गईं। इस खेमे में शामिल बताए जा रहे अन्य सांसदों में अबू ताहिर, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीकुर रहमान, बापी हलदर, रचना बनर्जी, मिताली बाग, देव अधिकारी और पार्थ भौमिक शामिल हैं। वहीं, सुष्मिता देव सहित कई सांसदों ने इस्तीफा भी दे दिया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा 10 जून को मंजूर कर लिया।
इससे पहले, TMC के सीनियर नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता, दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की आलोचना की और नतीजों को ममता बनर्जी की सरकार के 15 साल के अराजक शासन का नतीजा बताया।
कांग्रेस में विलय की अटकलें
अंदरूनी कलह ने TMC और कांग्रेस के बीच विलय की अटकलों को भी हवा दी है। जब ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। उनके अलावा TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से रिश्ते मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा के लिए मुलाकात की। कांग्रेस ने किसी भी विलय की खबरों को खारिज कर दिया है।
सुखेंदु शेखर रॉय ने साथ छोड़ा
हर राजनीतिक बगावत के पीछे कोई न कोई वजह होती है। TMC मं यह भूमिका सुखेंदु शेखर रॉय ने निभाई है। सत्ता के हाशिए से उभरने वाले कई बागियों के उलट रॉय पार्टी के मुख्य ढांचे का हिस्सा थे। राज्यसभा सांसद, वकील और संसद में पार्टी की सबसे मुखर आवाजों में से एक होने के नाते उन्हें नेतृत्व के भरोसेमंद करीबी लोगों में गिना जाता था। सालों तक उन्होंने विवादों और संकटों के दौरान पार्टी का बचाव किया। इसलिए, उनके इस्तीफे का महत्व सिर्फ एक सांसद के जाने से कहीं ज्यादा था।
बंगाल की राजनीति में तृणमूल से नेताओं का पाला बदलना कोई नई बात नहीं है। रॉय का जाना इसलिए अलग था क्योंकि यह ऐसे नेता की तरफ से हुआ था जिन्हें बगावत से बहुत कम फायदा और बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता था। उनकी आलोचना ने भाजपा से चुनाव हारने के बाद से पनप रही उन फुसफुसाहटों को विश्वसनीयता प्रदान की, जिन्हें तब तक छिटपुट शिकायतें मानकर खारिज कर दिया गया था।




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