सुदीप बंद्योपाध्याय बनाम काकोली घोष; टीएमसी के बागी खेमे में खींचतान, कौन करेगा लीड
टीएमसी में विद्रोह की आग तेजी से फैली है। विद्रोही लोकसभा सांसदों की संख्या अब करीब 22 तक पहुंच गई है, जबकि 60 से अधिक विधायक भी उनके साथ जुड़ चुके हैं। इसके अलावा, तीन राज्यसभा सांसद पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इन दिनों गहरे संकट से गुजर रही है। हाल ही में 6 बार के लोकसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय के विद्रोही गुट में शामिल होने की खबर ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी। ममता बनर्जी के वफादारों की सूची तेजी से सिकुड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, सुदीप बंद्योपाध्याय न केवल विद्रोह में शामिल हो रहे हैं, बल्कि वे विद्रोही लोकसभा सांसदों के गुट का नेतृत्व संभाल सकते हैं। वर्तमान में काकोली घोष दस्तिदार विद्रोही गुट की अगुवाई कर रही हैं, लेकिन कई सांसद उनके नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। यह घटनाक्रम TMC के अलग गुट में नेतृत्व की खींचतान को और तीखा बना रहा है।
टीएमसी में विद्रोही सांसदों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। करीब 22 लोकसभा सांसद और 60 से ज्यादा विधायक ममता बनर्जी व उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बिना नई तृणमूल कांग्रेस बनाने पर अड़े हुए हैं। तीन राज्यसभा सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया है कि उनका गुट अब 22 सांसदों तक पहुंच गया है और दो और नाम जल्द घोषित किए जाएंगे। विद्रोही सांसद सोमवार को दिल्ली में बैठक करने वाले हैं, जिसमें भाजपा नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
BJP के संपर्क में टीएमसी का विद्रोही गुट
तृणमूल का विद्रोही गुट लोकसभा में भाजपा नीत एनडीए को समर्थन देने का इरादा रखता है। सांसद शताब्दी रॉय ने पहले ही 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र की जानकारी दी थी। यह खींचतान पार्टी की आंतरिक एकता को पूरी तरह चुनौती दे रही है। विधानसभा में भी विद्रोह उतना ही गंभीर है। विद्रोही विधायक रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है। उन्होंने दावा किया है कि TMC के 80 विधायकों में से 64 उनके साथ हैं, जो दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा है। इससे एंटी-डिफेक्शन कानून से सुरक्षा मिलती है। रितब्रत बनर्जी फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार हैं और स्पीकर को सूची सौंप चुके हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो सदन में अपनी ताकत साबित करेंगे।
क्राइसिस मैनेजमेंट में जुटे ममता के करीबी
संसद और विधानसभा दोनों जगहों पर विद्रोह एक साथ उभरने से ममता बनर्जी और उनके वफादार क्राइसिस मैनेजमेंट में जुटे हुए हैं, लेकिन सफलता मिलती नहीं दिख रही है। विद्रोह का मुख्य निशाना ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के दूसरे नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी हैं। कई वरिष्ठ नेताओं ने उन पर अहंकारी शैली होने का आरोप लगाया है। सांसद कल्याण बनर्जी ने उन्हें अहंकारी बताते हुए कहा कि अभिषेक की वजह से पार्टी तबाह हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक खुद को राजा समझते हैं। हालांकि बाद में कल्याण बनर्जी ने इसे बेटे जैसा रिश्ता बताकर कुछ नरमी दिखाई, लेकिन असंतोष साफ है।




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