TMC के 10-15 सांसद मेरे संपर्क में, भाजपा विधायक का बड़ा दावा; ममता बनर्जी की पार्टी का टूटना तय?
TMC से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी के एक बड़े धड़े के अलग होने की चर्चाओं ने हलचल बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने मंगलवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में महाराष्ट्र जैसी स्थिति बन सकती है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिले हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस टूटने की कगार पर है। चर्चा है कि पार्टी से निष्काषित ऋतब्रत बनर्जी सहित कई विधायक अलग होकर नया गुट बना सकते हैं। ऐसे में बंगाल में महाराष्ट्र की तरह खेला होने की भी खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने TMC को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। भाजपा के एक विधायक ने दावा किया है कि TMC के करीब 15 सांसद उनके संपर्क में हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि टीएमसी किसी भी क्षण टूट सकती है।
यह दावा एगरा से बीजेपी विधायक दिव्येंदु अधिकारी ने किया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि टीएमसी के कई सांसद लगातार उनके संपर्क में हैं। अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि टीएमसी के भीतर का संकट अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां से वापसी मुमकिन नहीं है। दिव्येंदु अधिकारी ने कहा, "मौजूदा हालातों को देखते हुए अब टीएमसी में रहने या निलंबित होने का कोई मतलब नहीं रह गया है। पार्टी टेंपररी है और जल्दी ही पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।" हालांकि अधिकारी ने आगे कहा कि TMC के बागी विधायकों को फिलहाल भाजपा में शामिल करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारे प्रदेश अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा है कि अभी किसी को भी पार्टी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी आलाकमान जो भी फैसला लेगी, वही फाइनल होगा।”
गौरतलब है कि यह पूरा बवाल तब शुरू हुआ जब टीएमसी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने 2 विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को सस्पेंड कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों विधायकों ने विधानसभा में वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी ने दोनों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस बीच सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के कई असंतुष्ट और बागी विधायकों ने कोलकाता के एमएलए हॉस्टल और एक बड़े होटल में गुपचुप बैठकें भी की हैं।
बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा खेल?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच टीएमसी से बीजेपी में आए मंत्री तापस रॉय ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि टीएमसी इस वक्त ठीक उसी मोड़ पर खड़ी है जहां साल 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना खड़ी थी। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में भी महाराष्ट्र की तरह टीएमसी के अंदर एक बहुत बड़ा बंटवारा होने जा रहा है। विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में रॉय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में विभाजन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही यह पार्टी पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो जाएगी। रॉय ने दावा किया, ''कई नेताओं और विधायकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ये घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि पार्टी टूट की ओर बढ़ रही है, ठीक वैसी ही स्थिति जैसी महाराष्ट्र में हुई थी।”
TMC को अब भी आस
इन सब के बीच तृणमूल के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा हबकि पार्टी के ज्यादातर विधायक ममता बनर्जी के साथ बने रहेंगे और संगठन की कमान वरिष्ठ नेताओं के हाथों में ही रहेगी। टीएमसी ने हाल ही में चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित किया है। उन्होंने कहा, ''सत्तारूढ़ पार्टी के दबाव के चलते कुछ लोग जाली हस्ताक्षरों के बारे में बयान देने के लिए मजबूर हो रहे हैं। कुछ नेता टीएमसी के खिलाफ जाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी उन्हें पैसा दे रही है। हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''कुछ विधायक दबाव में आकर टूट सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर किसी बगावत की आशंका नहीं है। अधिकतर विधायक ममता बनर्जी के साथ बने रहेंगे और संगठन की कमान वरिष्ठ नेताओं के हाथों में ही रहेगी। पार्टी का चुनाव चिह्न भी ममता बनर्जी के पास ही रहेगा।''
क्या बोले ऋतब्रत बनर्जी?
मामले पर बयान देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने स्वीकार किया कि पार्टी के नेताओं के साथ उनकी बैठक हुई है। उन्होंने बताया कि विधायक हॉस्टल में उनकी मुलाकात कुछ विधायकों से हुई और उनके साथ मुरमुरा खाया था। बनर्जी ने कहा कि वे एक-एक दिन के हिसाब से आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं। हालांकि उन्होंने 50 से ज्यादा विधायकों के उनके साथ आने की अटकलों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
टीएमसी के सामने बड़ी चुनौती
पार्टी के सामने इस वक्त बड़ी चुनौती है। हाल में हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस 294 में से महज 80 सीटें जीत पाई थी। बता दें कि नियमों के मुताबिक सदन में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा बनाए रखने के लिए किसी भी पार्टी के पास कम से कम 29 विधायकों का समर्थन होना अनिवार्य है। अगर दिव्येंदु अधिकारी और तापस रॉय के दावे सच साबित होते हैं और टीएमसी में बड़ी टूट होती है, तो ममता बनर्जी की पार्टी से मुख्य विपक्षी दल का तमगा भी छिन सकता है।




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