जो राहुल गांधी को PM देखना चाहता है... ममता बनर्जी की वापसी की अटकलों पर कांग्रेस का बड़ा ऑफर
ममता बनर्जी की कांग्रेस में वापसी की अटकलों के बीच बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार का बड़ा बयान। कहा- जो राहुल गांधी को PM देखना चाहता है, उसके लिए दरवाजे खुले हैं। वहीं TMC के 64 बागी विधायकों ने किया विलय से इनकार।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची भारी उथल-पुथल के बीच एक बड़ी सियासी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि ममता बनर्जी अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी कर सकती हैं या टीएमसी का कांग्रेस में विलय हो सकता है। इन सुगबुगाहटों के बीच पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता है, उसके लिए कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं।
ममता और अभिषेक के लिए कांग्रेस का क्या रुख है?
बुधवार को जब शुभंकर सरकार से मीडिया ने पूछा कि क्या कांग्रेस टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को पार्टी में शामिल करने के लिए तैयार है, तो उन्होंने कहा, "राजनीति संभावनाओं की कला है। जो भी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है, वह पार्टी में शामिल हो सकता है।" जब उनसे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की एंट्री को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ किया कि अभिषेक पर भी यही शर्तें लागू होंगी।
कांग्रेस में वापसी की अटकलें क्यों तेज हुईं?
दरअसल, बीते दो दिनों के भीतर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ कई अहम बैठकें की हैं। इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ममता अपनी 'मूल पार्टी' की तरफ लौट सकती हैं।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से निकाले जाने के बाद ही टीएमसी की स्थापना की थी। साल 2011 में वाममोर्चा के 34 साल पुराने शासन को उखाड़ फेंकने के बाद टीएमसी सत्ता में आई और 2026 तक पूरे 15 साल राज किया। 2021 से पहले टीएमसी ने कांग्रेस की कई नगरपालिकाओं पर कब्जा किया था और कई कांग्रेसी विधायकों को अपने पाले में किया था। इसी पुराने इतिहास को देखते हुए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक धड़ा ममता की वापसी का विरोध भी कर रहा है।
टीएमसी में ऐतिहासिक बगावत, 'असली तृणमूल' का दावा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (2026) में मिली करारी हार के मुश्किल से एक महीने बाद ही टीएमसी भयंकर बगावत का सामना कर रही है। पार्टी के अधिकतर राज्य विधायक बागी हो चुके हैं और सांसदों में भी फाड़ पड़ गई है। लोकसभा में करीब 20 टीएमसी सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया है और ये सांसद अब बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देंगे।
वहीं राज्य विधानसभा में टीएमसी के बागी विधायकों ने रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है। विधानसभा के बाहर रितब्रत बनर्जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनके गुट का कांग्रेस में विलय करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, "हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और हम कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं।"
'80 में से 64 विधायक हमारे साथ'
उलुबेरिया पूर्व से विधायक रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके खेमे में बागी विधायकों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ेगा। बता दें कि 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के केवल 80 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके थे।
रितब्रत ने आगे कहा, "संसद में भी दो-तिहाई से अधिक सांसद कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं। तो फिर कौन किसमें विलय कर रहा है? जहां तक हमारी जानकारी है, न तो सांसद जा रहे हैं, न हम जा रहे हैं, और न ही नगरपालिका या जिला परिषद के कोई सदस्य जा रहे हैं।"
राज्यसभा में भी गिरता ग्राफ
पार्टी के भीतर मची इस भगदड़ का असर राज्यसभा में भी दिख रहा है। बुधवार को टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उच्च सदन में पार्टी सांसदों की संख्या घटकर मात्र 11 रह गई है। इससे पहले सोमवार को सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी और अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।




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