this is blot on Democracy You prevented me to speak on Presidential address in Lok Sabha Rahul Gandhi letter to om birla आपने बोलने नहीं दिया, यह लोकतंत्र पर काला धब्बा; लोकसभा अध्यक्ष को राहुल गांधी ने लिखी चिट्ठी, India News in Hindi - Hindustan
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आपने बोलने नहीं दिया, यह लोकतंत्र पर काला धब्बा; लोकसभा अध्यक्ष को राहुल गांधी ने लिखी चिट्ठी

राहुल ने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के इशारे पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है, जिसके विरुद्ध मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं।

Tue, 3 Feb 2026 08:53 PMPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
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आपने बोलने नहीं दिया, यह लोकतंत्र पर काला धब्बा; लोकसभा अध्यक्ष को राहुल गांधी ने लिखी चिट्ठी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार (3 फरवरी) को स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के इशारे पर खुद को सदन में बोलने से रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर काला धब्बा है। उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सदस्य का बोलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है, लेकिन इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को दरकिनार किए जाने के कारण एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है।

सदन में गतिरोध के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार की तरह मंगलवार को भी पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित लेख का हवाला देकर चीन का विषय उठाने का प्रयास किया, लेकिन आसन से इसकी अनुमति नहीं मिली। हालांकि उन्होंने इस लेख को सत्यापित किया और सदन के पटल पर रखा।

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राहुल ने पत्र में क्या लिखा?

पत्र में राहुल गांधी ने कहा, ''सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आपने मुझे उस पत्रिका के लेख को सत्यापित करने का निर्देश दिया था, जिसका मैं उल्लेख करना चाहता था। आज जब मैंने अपना भाषण फिर से शुरू किया, तो मैंने उस दस्तावेज को सत्यापित कर दिया।''उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा और पूर्व अध्यक्षों के बार-बार दिए गए निर्णयों के अनुसार, यदि कोई सदस्य सदन में किसी दस्तावेज का उल्लेख करना चाहता है, तो उसे पहले उसे सत्यापित करना होता है और सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है।

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लोकसभा में मुझे बोलने से रोकना संसदीय परंपरा का उल्लंघन

राहुल गांधी का कहना है, ''एक बार यह शर्त पूरी हो जाए, तो अध्यक्ष सदस्य को उस दस्तावेज को उद्धृत करने या उसका संदर्भ देने की अनुमति देते हैं। इसके बाद उस पर उत्तर देना सरकार की जिम्मेदारी होती है और अध्यक्ष की भूमिका वहीं समाप्त हो जाती है।'' उन्होंने कहा, ''आज लोकसभा में मुझे बोलने से रोकना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह गंभीर आशंका भी पैदा होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर, नेता प्रतिपक्ष होने के नाते, मुझे जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। यह दोहराना आवश्यक है कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिस पर संसद में चर्चा होना अनिवार्य है।''

लोकतंत्र पर एक काला धब्बा

कांग्रेस नेता ने कहा कि सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में यह लोकसभा अध्यक्ष की संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है कि वह हर सदस्य, विशेष रूप से विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करें। राहुल गांधी ने कहा, ''नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सदस्य का बोलने का अधिकार हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है। इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से इनकार किए जाने के कारण एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है।''उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के इशारे पर अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना पड़ा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ''यह हमारे लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है, जिसके विरुद्ध मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं।''