The Man Behind tmc rebellion bjp mp cm ramesh mamat banerjee mps switching sides शुभेंदु और भूपेंद्र तो सिर्फ चेहरा हैं, TMC में बगावत के पीछे आंध्र के BJP सांसद का हाथ?, India News in Hindi - Hindustan
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शुभेंदु और भूपेंद्र तो सिर्फ चेहरा हैं, TMC में बगावत के पीछे आंध्र के BJP सांसद का हाथ?

TMC Rebellion Inside Story: तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसदों की बगावत के पीछे आंध्र प्रदेश के बीजेपी सांसद सीएम रमेश का नाम सामने आ रहा है। महुआ मोइत्रा के तंज से लेकर शुभेंदु अधिकारी की डिनर मीटिंग तक, पूरी इनसाइड स्टोरी।

Sat, 13 June 2026 09:15 AMAmit Kumar हिन्दुस्तान टाइम्स, सुनेत्रा चौधरी, नई दिल्ली
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शुभेंदु और भूपेंद्र तो सिर्फ चेहरा हैं, TMC में बगावत के पीछे आंध्र के BJP सांसद का हाथ?

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मची बगावत की पटकथा में एक बेहद चौंकाने वाला किरदार सामने आया है। यह नाम आंध्र प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 61 वर्षीय सांसद सीएम रमेश का है। कभी टीडीपी का हिस्सा रहे और अब तेलुगु भाषी बीजेपी सांसद सीएम रमेश आखिर टीएमसी सांसदों को भगवा पार्टी की ओर क्यों और कैसे खींच रहे हैं?

भले ही इस पूरे 'ऑपरेशन' का आधिकारिक जिम्मा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पास है, लेकिन पर्दे के पीछे से टीएमसी सांसदों को साधने और फोन कॉल्स करने का सबसे ज्यादा काम कारोबारी से राजनेता बने रमेश ही कर रहे हैं।

'कुछ ही घंटों में किसी को भी मना सकता हूं'

सीएम रमेश ने खुद भी इस दलबदल में अपनी भूमिका को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, 'मेरी खासियत लोगों को राजी करना है। मुझे बस कुछ घंटों का समय चाहिए और मैं किसी को भी बीजेपी में शामिल होने के लिए मना लूंगा।'

रमेश का कहना है कि वे ज्यादातर टीएमसी सांसदों को लंबे समय से जानते हैं। संसद की कैंटीन में मुलाकात करते-करते पिछले कुछ वर्षों में उनके बीच एक गहरा रिश्ता बन गया है। इस रिश्ते की झलक 2020 में भी दिखी थी, जब रमेश के बेटे की शादी के जश्न में दुबई और हैदराबाद में पार्टी लाइन से हटकर कई सांसद पहुंचे थे। इनमें ममता बनर्जी की तत्कालीन कट्टर वफादार और अब बागी हो चुकीं शताब्दी रॉय भी शामिल थीं।

किन 2 वादों पर पाला बदल रहे हैं टीएमसी के 22 सांसद?

ममता के वफादारों और इस बगावत के आलोचकों का कहना है कि कुल 22 सांसदों (लोकसभा के 19 और राज्यसभा के 3) को मुख्य रूप से दो वादे करके बीजेपी में शामिल होने के लिए मनाया गया है।

  • पहला वादा: केंद्र सरकार उनके निर्वाचन क्षेत्रों का पूरा ध्यान रखेगी, ताकि वहां की जनता उनसे नाराज न हो।
  • दूसरा वादा: उन्हें ईडी (ED) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और सीआईडी (CID) की कार्रवाई से भी पूरी तरह राहत मिलेगी। इसके बदले में उन्हें बस हस्ताक्षर करने होंगे।

हालांकि, सीएम रमेश ने किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन से साफ इनकार किया है। उनका कहना है, 'इसमें पैसे की कोई बात नहीं है, न ही कोई पद है और यह कमर्शियल भी नहीं है।'

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'बंगाल के केक में अपनी किशमिश डाल रहे रमेश'

टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी की वफादार महुआ मोइत्रा का मानना है कि इस बगावत के पीछे रमेश मुख्य ताकत नहीं हैं, जैसा कि उन्हें बताया जा रहा है। महुआ ने कहा, 'रमेश मेरे दोस्त हैं। उन्हें राजनीति में प्रासंगिक बने रहना पसंद है। कुछ लोग जमीन पर रहकर प्रासंगिक बनते हैं, तो कुछ अच्छे नेटवर्क के जरिए। रमेश बीजेपी के सामने अपनी अहमियत साबित करना चाहते हैं।' महुआ ने तंज कसते हुए कहा, 'उन्हें लगा कि एक केक बेक हो रहा है, तो चलो मैं भी कम से कम उसमें अपनी एक किशमिश डाल दूं। न तो वे बेकर हैं और न ही उनके पास सामग्री है, लेकिन उन्होंने अचानक तस्वीर में आने का फैसला किया।'

2019 में टीडीपी में भी कराई थी ऐसी ही टूट

यह पहली बार नहीं है जब सीएम रमेश ने इस तरह का कोई कदम उठाया है। 2019 में जब चंद्रबाबू नायडू ने जगन रेड्डी के हाथों सत्ता गंवाई थी, तब रमेश ने टीडीपी में भी ऐसी ही बगावत की पटकथा रची थी। उस समय भी एक महीने के भीतर टीडीपी के 6 में से 4 सांसद बीजेपी में शामिल हो गए थे। दिलचस्प बात यह है कि काकोली घोष और कुछ अन्य टीएमसी सांसदों की तरह, रमेश भी बीजेपी में शामिल होने से पहले कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रडार पर थे।

हाल ही में रमेश कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के चुनाव में भी सक्रिय थे, जहां राजीव प्रताप रूडी और संजीव बालियान के बीच मुकाबला था। यहीं उन्होंने झारखंड के बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के साथ पहली बार टीम बनाई थी। चर्चा है कि निशिकांत दुबे भी इस टीएमसी ऑपरेशन में शामिल हैं। नाम न छापने की शर्त पर टीएमसी के एक राज्यसभा सांसद ने बताया, 'हमें पता है कि सीएम रमेश उस समय टीएमसी के तीन सांसदों के लगातार संपर्क में थे।'

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शुभेंदु अधिकारी की भूमिका भी अहम

भले ही रमेश पर्दे के पीछे से सांसदों को मना रहे हों, लेकिन यह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ही हैं, जिन्होंने सायोनी घोष जैसे हिचकिचाते सांसदों को हस्ताक्षर करने के लिए राजी किया। इनमें से कई सांसदों ने सहमति देने से पहले सुवेंदु अधिकारी के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की शर्त रखी थी। यह अहम मुलाकात 8 जून को शताब्दी रॉय के घर पर एक डिनर के दौरान हुई। यह वही दिन था जब दिल्ली में 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के सहयोगियों की बैठक चल रही थी।

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