एक ही बिरादरी के पास 13 फीसदी से अधिक जमीन, किस राज्य के सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े
सर्वे के अनुसार, सामान्य जाति के परिवारों में कार स्वामित्व की दर ओबीसी के मुकाबले तीन गुना और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) के मुकाबले 5 गुना अधिक है। ब्राह्मण समुदाय में कार रखने वाले परिवारों का प्रतिशत 16.4 है।

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की ओर से कराए गए जाति सर्वेक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य की कुल आबादी में मात्र 4.8 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले रेड्डी समुदाय के पास पूरे राज्य की 13.5 प्रतिशत भूमि है। इसके बाद यादव समुदाय आता है, जिसकी आबादी 5.7 प्रतिशत है और जो 8.7 प्रतिशत भूमि का मालिक है। यह आंकड़े तेलंगाना सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति सर्वे-2024 में दर्ज किए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट 15 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में प्रति परिवार औसत सिंचित भूमि 0.7 एकड़ है। अधिकांश जातियां इस औसत से कम सिंचित भूमि रखती हैं, जबकि बीसी-बी पेरिका, वेलमा और रेड्डी समुदाय इसमें आगे हैं। रिपोर्ट में रेड्डी समुदाय को ऐतिहासिक भूमि संचय का लाभार्थी बताया गया है, जबकि एससी बेदा और सामान्य मुस्लिम समुदाय भूमि से वंचित दिखे हैं।
सर्वे के अनुसार, सामान्य जाति के परिवारों में कार स्वामित्व की दर ओबीसी के मुकाबले तीन गुना और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) के मुकाबले 5 गुना अधिक है। ब्राह्मण समुदाय में कार रखने वाले परिवारों का प्रतिशत 16.4 है, जो राज्य औसत से पांच गुना ज्यादा है। राजू, कम्मा, कापू, कोमाटी, वेलमा और जैन समुदाय भी कार स्वामित्व में काफी आगे हैं, जो उनकी आर्थिक समृद्धि को दर्शाता है। वहीं, सबसे वंचित समुदायों में कार स्वामित्व लगभग न के बराबर है। एसटी कोलाम में यह मात्र 0.2 प्रतिशत है, जबकि अन्य जनजातीय समूह जैसे गोंड और कोया भी औसत से बहुत नीचे हैं। यह सर्वे 3.55 करोड़ लोगों की स्थिति, भावनाओं, अनुभवों और आकांक्षाओं को 75 क्षेत्रों में दर्ज करके तेलंगाना समाज की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत चित्र प्रस्तुत करता है।
बाल विवाह की समस्या भी उजागर
तेलंगाना जाति सर्वे में बाल विवाह की समस्या भी उजागर हुई है। राज्य में 18 वर्ष से कम उम्र की लगभग 5 प्रतिशत यानी 2.16 लाख लड़कियों का विवाह हो चुका है। राज्य में औसत महिला-पुरुष अनुपात 0.98 है। गोंड, कोया (ST), माला और मादिगा (SC) समुदायों में यह अनुपात 1 से अधिक है, जबकि इयेंगर/अय्यर, जैन, राजू और सामान्य मुस्लिम समुदायों में यह औसत से काफी कम है। रिपोर्ट में इयेंगर/अय्यर समुदाय में बाल विवाह की दर 21.2 प्रतिशत बताई गई है, जो राज्य औसत से पांच गुना अधिक है। जैन समुदाय में यह 11 प्रतिशत है, जो औसत से दोगुना है। सर्वे में महिलाओं की शिक्षा स्थिति भी चिंताजनक है। राज्य में लगभग दो-तिहाई महिलाएं माध्यमिक शिक्षा से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। एसटी कोलाम महिलाओं में यह आंकड़ा 83 प्रतिशत तक पहुंचता है, जबकि ब्राह्मण महिलाओं में मात्र 36.2 प्रतिशत ही माध्यमिक से आगे नहीं बढ़ी हैं। राजू, जैन, कोमाटी और कम्मा महिलाएं भी शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
सर्वे रिपोर्ट में एससी-एसटी समूहों में शिक्षा के अभाव को दर्शाया गया है। हालांकि, एससी माला महिलाओं में राज्य औसत से बेहतर स्थिति दिखी है। इससे समुदायों के अंदर विविधता का पता चलता है और हस्तक्षेप की जरूरत पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट ऐतिहासिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त समुदायों की बेहतर स्थिति को उनके भूमि, शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा से जोड़ती है। वंचित समुदायों में भूमि, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी उनके पिछड़ेपन को बढ़ाती है। तेलंगाना सरकार ने इस सर्वे को समाज की स्वास्थ्य जांच का अहम दस्तावेज बताया है, जो नीति निर्माण में मदद करेगा।




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