लोकसभा में काले रंग को लेकर टकराव, कनिमोझी ने पीएम मोदी पर कसा तीखा तंज
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा डीएमके सांसदों के काले कपड़े पहनकर आने पर कसे गए तंज पर आज सांसद कनिमोझी ने जबाव दिया है। उन्होंने कहा काले रंग को मां काली और पेरियार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि काला रंग हमारे बौद्धिक नेता पेरियार का रंग है। मां काली भी काले रंग के कपड़े पहनती हैं।

women reservation bill 2026: महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर लोकसभा में चर्चा जारी है। इन बिलों के विरोध में डीएमके के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद में बैठे हुए हैं। कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सांसदों को काला टीका कहकर परोक्ष रूप से हमला किया था। आज डीएमके सांसद कनिमोझी ने पीएम मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि मां काली की प्रतिमा की तरफ से इशारा करते हुए उन्हें सर्वशक्तिमान और स्त्रीत्व का मजबूत प्रतीक बताया।
महिला आरक्षण और परीसीमन बिल पर कनिमोझी ने शुक्रवार को संसद को संबोधित किया। उन्होंने कहा, " जिस रंग से हमने विरोध किया है, वही पेरियार का रंग है... हमारे बौद्धिक नेता का रंग है। उन्होंने हमें लड़ना सिखाया है। हमें आत्मसम्मान सिखाया है। मुझे आश्चर्य होता है कि यहां पर मौजूद लोग हिंदुत्व की रक्षा करने का दावा करते हैं। उन्हें काले रंग के कपड़े पहनने वाली काली देवी याद नहीं है। मां काली नारी शक्ति का प्रतीक हैं। वह अहंकार, अज्ञान और अहंकार को दूर भगाने वाली स्त्री हैं।"
बात को आगे बढ़ाते हुए कनिमोझी ने कहा कि डीएमके कल पेश किए गए परिसीमन विधेयक का विरोध करती है। उन्होंने कहा, "इस मामले पर एक नया विधेयक पेश किया जाना चाहिए और व्यापक परामर्श के लिए करीब तीन महीने का सार्वजनिक डोमेन रखा जाना चाहिए।"
पीएम मोदी ने डीएमके सांसदों को काले टीके के लिए दिया था धन्यवाद
बता दें, डीएमके सांसद की तरफ से यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने काले कपड़े पहनकर आए डीएमके सांसदों को शुभ काम में काला टीका बताकर निशाना साधा था। इसके बाद प्रियंका गांधी ने भी इसका जिक्र किया था। सांसदों के काले कपड़ों को लेकर वरिष्ठ नेता दयानिधि मारन ने कहा कि यह परिसीमन प्रक्रिया के विरोध में था, जिससे दक्षिणी राज्यों को डर है कि संसद में उनकी आवाज छिन जाएगी।
परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत में डर
गौरतलब है कि परिसीमन विधायक को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि इसे 2011 के जनसंख्या आंकड़ों के आधार करने से उनके राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी। क्योंकि पिछले दशकों में उत्तर भारतीय राज्यों की तुलना में उनकी जनसंख्या काफी कम गति से बढ़ी है। इसकी वजह से दक्षिण भारत की पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि जिन उत्तरी, हिंदी भाषी राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, उन्हें अधिक सीटें और महत्व मिलेगा।
भले ही दक्षिण भारत की पार्टियां इस परिसीमन को उनके खिलाफ बता रही हों, लेकिन कल अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी इस चिंता को दूर करने का प्रयास किया था। उन्होंने दक्षिण भारत की सीटें कम न होने की गारंटी दी। इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह ने भी एक लिस्ट जारी करके सभी दक्षिण भारत के राज्यों को समानता के आधार पर सीट बांटने का भरोसा दिलाया था




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