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शुभेंदु अधिकारी ने शादी नहीं की, पश्चिम बंगाल के नए CM के पास संपत्ति कितनी; कोई गाड़ी भी नहीं

कभी ममता बनर्जी के करीबी नेता रहे शुभेंदु अधिकारी 15 साल से सत्ता पर काबिज 'दीदी' को भवानीपुर से हराकर सीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं। शुभेंदु अधिकारी अविवाहित हैं और उन्होंने अपनी संपत्ति करीब 85 लाख घोषित की है।

Sat, 9 May 2026 10:33 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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शुभेंदु अधिकारी ने शादी नहीं की, पश्चिम बंगाल के नए CM के पास संपत्ति कितनी; कोई गाड़ी भी नहीं

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वह सपना पूरा हो गया है, जिसके सच होने की कल्पना कुछ साल पहले तक भगवा दल के कार्यकर्ता भी नहीं करते थे। बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में नरेंद्र मोदी से लेकर राज्य में पार्टी के सबसे पुराने कार्यकर्ता माखनलाल सरकार तक की मौजूदगी में पद और गोपनीयता की शपथ ली। कभी ममता बनर्जी के करीबी नेता रहे शुभेंदु अधिकारी 15 साल से सत्ता पर काबिज 'दीदी' को भवानीपुर से हराकर सीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं।

57 साल के शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर के अलावा नंदीग्राम से भी चुनाव जीते हैं, जहां उन्होंने 2021 में ममता बनर्जी को मात देकर देशभर में चर्चा का विषय बन गए थे। कांग्रेस और टीएमसी के रास्ते भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी ने अपना जीवन पूरी तरह राजनीति और लोकसेवा के प्रति समर्पित रखा है। वह पूर्ववर्ती सीएम ममता बनर्जी की तरह अविवाहित हैं। शिशिर कुमार अधिकारी के बेटे शुभेंदु ने रबिंद्र भारती यूनिवर्सिटी से 2011 में एमए की डिग्री ली थी। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति 85,87,600 रुपये घोषित की थी। जबकि उन पर किसी तरह का कर्ज नहीं है। अधिकारी पेशे से कारोबारी भी हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनके पास कोई गाड़ी नहीं है।

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कांग्रेस नेता के रूप में जीता पहला चुनाव

शुभेंदु अधिकारी के पास ना सिर्फ संगठन की अच्छी समझ है, बल्कि ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे होने की वजह से उनके पास सत्ता का भी अनुभव है। अधिकारी ने 31 साल की उम्र में पहला चुनाव जीता था, जब वह कोंटाई नगर परिषद से कांग्रेस के पार्षद चुने गए। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और 20 साल पहले 2006 में पहली बार कोंटाई साउथ सीट से पहली बार विधायक बने।

टीएमसी में कैसे बढ़ा कद

2007 में लेफ्ट शासन के दौरान जब नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ममता बनर्जी ने चर्चित आंदोलन हुआ किया तो शुभेंदु अधिकारी ही उनके कर्ताधर्ता थे। आंदोलन को धार देने का श्रेय अधिकारी को ही जाता है। टीएमसी में अधिकारी का कद इसके बाद तेजी से बढ़ा और उन्हें 2009 में पार्टी ने संसद भेजने का फैसला किया। अधिकारी तामलुक सीट से सांसद चुने गए। 2016 में एक बार फिर नंदीग्राम सीट से विधायक चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में मंत्री बने।

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फिर भाजपा में रचा इतिहास

शुभेंदु अधिकारी 2020 में ममता बनर्जी से नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें ममता बनर्जी के खिलाफ उतार दिया। नंदीग्राम सीट पर हुई चर्चित जंग में अधिकारी ने 10 साल की सीएम ममता बनर्जी को हराकर खलबली मचा दी और पश्चिम बंगाल में ममता के खिलाफ सबसे मजबूत चेहरे के रूप में खुद को स्थापित कर लिया। यही वजह है कि 2026 में एक बार फिर उन्होंने ममता बनर्जी को चुनौती दी और वह भी उनके गढ़ भवानीपुर में। नतीजा फिर वही हुआ और शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा का पहला सीएम बनकर इतिहास रच दिया है।