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शुभेंदु अधिकारी नहीं, अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में किसके जीतने पर बजवाई ताली

अमित शाह ने औसग्राम विधानसभा सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचीं कलिता माझी का अपने भाषण में विशेष तौर पर जिक्र किया। गृहमंत्री अमित शाह ने कलिता के लिए ताली बजवाई।

Sat, 9 May 2026 09:42 AMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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शुभेंदु अधिकारी नहीं, अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में किसके जीतने पर बजवाई ताली

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली सरकार के लिए मुख्यमंत्री पद के लिए शुभेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने याद किया कि किस तरह 100 साल की वैचारिक यात्रा और लंबे संघर्ष के बाद यह संभव हो पाया है। शाह ने 2015 में भाजपा का खाता खुलने से 2026 में 207 सीटों तक पहुंचने के सफर को आनंददायक बताया, लेकिन कहा कि इसका रास्ता बेहद कष्टदायक रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 321 भाजपा कार्यकर्ताओं ने जान गंवाई तब जाकर यह दिन आया है। भाजपा की जीत की खास बातें गिनाते हुए उन्होंने शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की तो एक अन्य नवनिर्वाचित विधायक के लिए ताली भी बजवाई।

अमित शाह ने औसग्राम विधानसभा सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचीं कलिता माझी का अपने भाषण में विशेष तौर पर जिक्र किया। कभी दूसरों के घरों में बर्तन मांजने वाली कलिता ने तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया है। शाह ने भाजपा के कुछ खास विजेता प्रत्याशियों का जिक्र किया और उनकी जीत के मायने बताए। इस दौरान उन्होंने कलिता मांझी के लिए ताली भी बजवाई।

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'कलिता माझी के लिए ताली बजाओ'

अमित शाह ने कहा, 'पानीहाटी की प्रत्याशी रत्नादेवनाथ, बंगालभर में माताओं-बहनों पर जो अत्याचार हुआ है, उसका प्रतीक बनकर सभी माताओं-बहनों को ढाढस दिया है। हिंगलगंज की प्रत्याशी रेखा पात्रा, संदेशखाली के अत्याचार के सामने सत्याग्रह की प्रतीक और औसग्राम की प्रत्याशी कलिता मांझी... कलिता माझी के लिए ताली बजाओ जरा। बंगाल के दारुण से दारुण गरीबी में जी रही सभी बहनों के लिए आशा का बिंदू है कि हमारा भी प्रतिनिधि विधानसभा में बैठ गया।'

कलिता मांझी ने नामांकन के बाद छोड़ा काम

बेहद गरीब परिवार से आने वाली कलिता माझी 2014 तक भाजपा की एक बूथ एजेंट थी, जो अपने समर्पण और लगन की वजह से लगातार पार्टी में आगे बढ़ती गईं। 2021 में भी पार्टी ने कलिता को टिकट दिया था लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा। दूसरे प्रयास में कलिता विधायक बन गईं। वह पार्टी में बोलपुर जिले की महासचिव होने के बावजूद दूसरों के घरों में बर्तन मांजती रहीं। कलिता का कहना है कि उन्होंने टिकट मिलने के एक सप्ताह बाद तक यह काम जारी रखा। लेकिन नमांकन के बाद प्रचार में व्यस्तता की वजह से घरेलू सहायिका के तौर पर अपना काम बंद किया।

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जीत पर और क्या बोले शाह

शाह ने कहा, यह जीत सिर्फ भाजपा के विस्तार या उसकी विचारधारा के बारे में नहीं है। न ही यह सिर्फ भाजपा-राजग द्वारा 21वें राज्य में अपनी सरकार बनाने के बारे में है। इस जीत का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इसने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में मौजूद सबसे बड़ी खामियों में से एक को दूर कर दिया है। अब पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और गौतस्करी असंभव हो जाएगी।' शाह ने कहा कि अब 'गंगोत्री से गंगासागर' तक भाजपा की सरकार है। उन्होंने पार्टी की जीत को जनसंघ संस्थापक मुखर्जी की वैचारिक विरासत की विजय बताया। उन्होंने कहा, 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में 1950 में शुरू हुई वैचारिक यात्रा ने अंततः 2026 में उनकी पार्टी को उनकी जन्मभूमि में सत्ता तक पहुंचा दिया। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।'

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