Supreme court senior lawyer Mahesh Jethmalani on Mamata Banerjee refusal to resign from CM she should be thrown out धक्के मारकर बाहर निकालना चाहिए, ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर बोले SC के वकील, India News in Hindi - Hindustan
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धक्के मारकर बाहर निकालना चाहिए, ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर बोले SC के वकील

बंगाल चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि वो हारी नहीं हैं और इसलिए राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। इस पर महेश जेठमलानी ने क्या कहा?

Wed, 6 May 2026 10:22 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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धक्के मारकर बाहर निकालना चाहिए, ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर बोले SC के वकील

पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद सियासी पारा हाई है। ममता बनर्जी ने बीजेपी को मिली जीत के बाद हार मानने से इनकार करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में राज्य में आने वाले दिनों में और बवाल मच सकता है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने ममता के इस रुख को लोकतांत्र के लिए चुनौती बताते हुए कहा है कि ममता बनर्जी को धक्के मारकर हटाए जाने की जरूरत है।

NDTV को दिए एक इंटरव्यू में महेश जेठमलानी ने कहा कि चुनाव आयोग ने परिणामों की घोषणा कर दी है जिससे मुख्यमंत्री का कार्यकाल खुद ही खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी का व्यवहार माफी के लायक नहीं है। चुनाव हारने के बाद वह मुख्यमंत्री कार्यालय में एक घुसपैठिया की तरह हैं। अगर वह शालीनता से इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल को उन्हें बेइज्जत करके पद से हटा देना चाहिए।"

जेठमलानी ने और क्या कहा?

महेश जेठमलानी के मुताबिक, मुख्यमंत्री राज्यपाल के आदेशानुसार पद पर रहते हैं। ऐसे में राज्यपाल उन्हें औपचारिक रूप से बर्खास्त कर पुलिस के जरिए बाहर निकलवा सकते हैं। वहीं ममता बनर्जी के 'सीटों की चोरी' के आरोप पर जेठमलानी ने कहा कि अगर उनके पास सबूत हैं तो वह कोर्ट जाएं, लेकिन इस तरह कुर्सी से चिपके रहना असंवैधानिक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही उन्हें फटकार लगा चुका है, अब वे अपना मजाक न बनवाएं।

ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश है। बता दें कि भाजपा ने बंगाल चुनावों में 207 सीट जीतकर 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत हासिल किया ह। ममता बनर्जी ने नतीजों को साजिश करके गढ़ा हुआ बताकर खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं। तृणमूल को सिर्फ 80 सीट ही मिल सकीं।

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ममता बनर्जी ने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, ''मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं। जनादेश लूटा गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?'' उन्होंने आगे कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है... मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।'' ममता बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीट की लूट हुई है और उनकी पार्टी का मनोबल तोड़ने के लिए मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ''कल मतगणना केंद्र के अंदर लात मारी गई, धकेला गया और बदसलूकी की गई।'' उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के जवान मतगणना केंद्रों के बाहर गुंडों जैसा व्यवहार कर रहे थे।

आगे क्या?

संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव हारने के बाद किसी मुख्यमंत्री द्वारा पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब विधानसभा चुनाव हारने के बाद किसी पराजित मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने से इनकार किया हो। उनके मुताबिक कहा कि अगर बनर्जी अपने रुख पर अडिग रहती हैं, यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के विकास में एक अभूतपूर्व क्षण साबित हो सकता है।

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राज्यपाल के पास शक्ति

बता दें कि तकनीकी रूप से, बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक जानकारों का मानना है कि चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा के बाद मुख्यमंत्री का इस्तीफा एक अनिवार्य परंपरा है। अगर मुख्यमंत्री ऐसा नहीं करते हैं, तो राज्यपाल के पास अनुच्छेद 164 के तहत सरकार को बर्खास्त करने की शक्ति होती है।

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वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा के मुताबिक कहा कि बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए, वरना नए मुख्यमंत्री के पदभार संभालने और सदन में बहुमत साबित करने के बाद वह खुद पद हट जाएंगी।सिन्हा ने कहा, "ममता बनर्जी को इस्तीफा देना होगा। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना होगा और सदन में बहुमत साबित करना होगा। नए मुख्यमंत्री के पदभार संभालने के बाद, यह मान लिया जाएगा कि वह पद से हट गई हैं।''