Supreme Court says woman cant be expected to sacrifice her career to be obedient wife आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए अपना करियर क्यों छोड़े औरत, सुप्रीम कोर्ट की 2 टूक; क्या था मामला?, India News in Hindi - Hindustan
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आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए अपना करियर क्यों छोड़े औरत, सुप्रीम कोर्ट की 2 टूक; क्या था मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि अपने करियर के लिए पति से अलग रहने को क्रूरता नहीं कहा जा सकता। इस दौरान SC ने निचली अदालतों के फैसले को भी पलट दिया।

Thu, 14 May 2026 07:35 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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आज्ञाकारी पत्नी बनने के लिए अपना करियर क्यों छोड़े औरत, सुप्रीम कोर्ट की 2 टूक; क्या था मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान शादी के बाद महिलाओं के अधिकारों को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। SC ने इस बात पर जोर दिया है कि एक पढ़ी-लिखी और कामकाजी महिला से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह शादी के बाद अपनी पहचान और करियर की बलि दे दे। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर कोई महिला अपने करियर के लिए पति से अलग रह रही है, तो उसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।

SC में एक डेंटिस्ट पत्नी और एक आर्मी ऑफिसर के बीच चल रहे विवाद पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सिर्फ महिला से त्याग माने जाने की सोच को दकियानूसी बताया। पीठ ने कहा, “यह उम्मीद करना कि महिला हमेशा अपने करियर का त्याग करे और एक 'आज्ञाकारी पत्नी' की पारंपरिक छवि में सिमट कर रहे, यह एक पुरानी और दकियानूसी सोच है।" पीठ ने कहा कि महिला अपने पति के घर का महज एक हिस्सा नहीं है। उसकी अपनी बौद्धिक और पेशेवर आकांक्षाएं हैं, जिनका सम्मान होना चाहिए।

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क्या है पूरा मामला?

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जोड़े की शादी 2009 में हुई थी। पति सेना में अधिकारी था। वहीं पत्नी ने अहमदाबाद में अपना डेंटल क्लिनिक शुरू किया था। शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने आरोप लगाए कि महिला ने अपने परिवार के बजाय करियर को चुना और पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। अर्जी के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी के इस फैसले को 'क्रूरता' माना था।

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कोर्ट ने कहा था कि पत्नी ने पति को बिना बताए अपना क्लिनिक शुरू किया और अहमदाबाद में रहने के दौरान ससुराल के बजाय अपने मायके में रुकना पसंद किया, जो सही नहीं है। वहीं गुजरात हाईकोर्ट ने भी 2024 में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।

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तलाक को दे दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के नजरिए को रूढ़िवादी बताया। SC ने तीखे शब्दों में कहा, "आज की दुनिया में जहां महिलाएं लंबी छलांगे लगा रही हैं। सिर्फ इसलिए कि पति एक आर्मी ऑफिसर है, यह उम्मीद करना कि पत्नी अपने करियर के बारे में सोच भी नहीं सकती, एक सामंती मानसिकता को दर्शाता है।" फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को रिकॉर्ड से हटा दिया। हालांकि, पति ने दूसरी शादी कर ली है और दोनों के बीच रिश्ते सुधरने की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी।