हम सब खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे; संजय कपूर संपत्ति विवाद पर बोला सुप्रीम कोर्ट
संजय कपूर प्रॉपर्टी विवाद में जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि वह (रानी कपूर) 80 साल की महिला हैं। हम सब खाली हाथ आए थे, और हमें खाली हाथ ही जाना है। हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा ले जाते हैं। मामले को सुलझाने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिवंगत कारोबारी संजय कपूर की संपत्ति में हिस्सेदार कंपनी रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (RIPL) द्वारा 18 मई को प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग के एजेंडा पर रोक लगा दी। इस एजेंडा में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और बैंक के कामकाज के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव से जुड़े मामले शामिल थे। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब वह संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर और उनकी तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच 30,000 करोड़ रुपये की पारिवारिक संपत्ति के विवाद की सुनवाई कर रही थी। इस विवाद में परिवार के अन्य दावेदार भी शामिल हैं। कोर्ट ने इमोशनल अपील करते हुए आपसी सहमति से विवाद को सुलझाने की बात की। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि रानी कपूर 80 साल की महिला हैं। हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ जाएंगे। इसे सुलझाने की पूरी कोशिश करिए।
कोर्ट ने पक्षों से यह भी कहा कि मध्यस्थता की कार्यवाही चलने के दौरान वे चल रहे विवाद को और न बढ़ाएं। कोर्ट का यह फैसला इस मामले में 80 साल की रानी कपूर की तरफ से दायर एक नई याचिका पर आया, जिसमें तय बैठक को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। खास तौर पर अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति को लेकर और यह मांग की गई थी कि जब तक इस मामले में मध्यस्थता की कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक बैठक पर रोक लगाई जाए।
कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष की तरफ से दी गई दलील पर भी गौर किया, जिसमें प्रिया सचदेव कपूर और कंपनी RIPL शामिल थे कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशों के अनुसार की जा रही है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि फिलहाल, पक्षों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिसका मध्यस्थता प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ सकता हो। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को आगे यह भी निर्देश दिया कि इस बीच, निदेशकों की नियुक्ति से जुड़ी वैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करने पर जोर न दिया जाए।
कोर्ट ने कहा कि अभी के लिए, दोनों पक्षों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे मध्यस्थता प्रक्रिया पर सीधा असर पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने RBI को आगे निर्देश दिया कि इस बीच, निदेशकों की नियुक्ति से जुड़े वैधानिक नियमों के पालन पर जोर देने की जरूरत नहीं है। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने दोनों पक्षों से भावनात्मक अपील भी की कि वे आपसी सहमति से विवाद को सुलझा लें। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “वह (रानी कपूर) 80 साल की महिला हैं। हम सब खाली हाथ आए थे, और हमें खाली हाथ ही जाना है। हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा ले जाते हैं। मामले को सुलझाने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। मध्यस्थ के सामने भारी मन से सिर्फ इसलिए मत जाइए कि कोर्ट ने आपको ऐसा करने के लिए कहा है। आप में से हर कोई कोशिश करे।”




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