supreme court grants bail mohammad kashif fake pm modi aide money laundering case 3 साल से जेल में बंद था पीएम मोदी का 'फर्जी करीबी', अब SC ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला, India News in Hindi - Hindustan
More

3 साल से जेल में बंद था पीएम मोदी का 'फर्जी करीबी', अब SC ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का फर्जी करीबी बनकर 1.10 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले मोहम्मद काशिफ को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। 3 साल से जेल में बंद आरोपी को कोर्ट ने किन शर्तों पर राहत दी, जानिए पूरा मामला।

Tue, 19 May 2026 09:55 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
3 साल से जेल में बंद था पीएम मोदी का 'फर्जी करीबी', अब SC ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद आरोपी मोहम्मद काशिफ को सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी। काशिफ पर आरोप है कि उसने पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के साथ अपनी एडिट की हुई यानी मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर लोगों से धोखाधड़ी की थी।

हाईकोर्ट के फैसले को किया रद्द

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें काशिफ की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी लगभग तीन साल से हिरासत में है और इस मामले में अपराध की कथित आय 1.10 करोड़ रुपये है। अदालत ने कहा- हम विवादित आदेश को इस कारण से रद्द करने के इच्छुक हैं कि अपीलकर्ता तीन साल से जेल में है।

आरोपी ने कोर्ट में दी यह अंडरटेकिंग

सुनवाई के दौरान आरोपी काशिफ ने कोर्ट को यह वचन दिया कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने उसे ट्रायल में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि काशिफ सहयोग नहीं करता है या जमानत की शर्तों और अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) जमानत रद्द कराने के लिए निचली अदालत का रुख कर सकता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:खालिद और शरजील को जमानत न देने के अपने ही फैसले पर SC ने उठाए सवाल, क्या कहा?

क्या है पूरा मामला?

ऐसे करता था ठगी: ईडी के मुताबिक, काशिफ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड और एडिटेड तस्वीरें पोस्ट की थीं। इसका मकसद लोगों में यह भ्रम पैदा करना था कि उसकी सरकार के उच्च स्तर तक सीधी पहुंच है।

नौकरी और ठेके का झांसा: इस झूठे रसूख का इस्तेमाल कर उसने लोगों से सरकारी विभागों में काम कराने, सरकारी नौकरी दिलाने और सरकारी ठेके दिलाने का वादा करके पैसे ऐंठे।

1.10 करोड़ की बरामदगी: यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से जुड़ा है, जो गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की एफआईआर पर आधारित था। ईडी ने काशिफ से जुड़े ठिकानों से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी का दावा किया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:दो जजों का फैसला अस्वीकार्य… अपने ही पुराने फैसले पर क्यों नाराज हो गए मीलॉर्ड?

कोर्ट में किसने क्या दी दलील?

काशिफ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मूल अपराध में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। वह 25 मई 2023 से हिरासत में है और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के ट्रायल में काफी देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नवंबर 2023 में आरोप तय हुए थे और अगस्त 2024 में पहले गवाह की गवाही पूरी हुई थी।

वहीं, ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया और कहा कि ट्रायल में कोई अनुचित देरी नहीं हुई है। इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ईडी की दलीलों को मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पुजारियों के चक्कर में मत पड़िए, आपको पता है वो कितना... BJP नेता को SC से झटका