सरायकेला छऊ के रंजीत कुमार आचार्य भारत सरकार की वरिष्ठ फैलोशिप के लिए चयनित
सरायकेला की चर्चित छऊ नृत्य शैली के साधक रंजीत कुमार आचार्य का चयन भारत सरकार द्वारा 2025-26 के लिए वरिष्ठ फैलोशिप के लिए किया गया है। उन्हें शोध हेतु 5 लाख रुपये की राशि मिलेगी। यह सम्मान सरायकेला की सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है।

सरायकेला। सरायकेला की ऐतिहासिक और पारंपरिक छऊ नृत्य शैली के लिए गौरव का क्षण सामने आया है। सरायकेला छऊ के जाने-माने साधक रंजीत कुमार आचार्य का चयन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से 2025–26 की प्रतिष्ठित वरिष्ठ फैलोशिप के लिए किया गया है।
फैलोशिप का विवरण
सरायकेला छऊ के अंतरराष्ट्रीय कलाकार एवं छऊ नृत्य विचित्रा संस्था के सह निदेशक रंजीत कुमार आचार्य को इस फेलोशिप के तहत उन्हें दो साल तक हर महीने 20 हजार रुपये के हिसाब से लगभग पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। आचार्य को उनके शोध विषय सरायकेला छऊ की वर्तमान वास्तविक स्थिति के आकलन, शास्त्रीय तत्व और संवर्धन के लिए उनका चयन हुआ है। इस शोध के माध्यम से वह सरायकेला छऊ की मौजूदा स्थिति, उसके शास्त्रीय पक्ष और भविष्य में इसके संरक्षण एवं संवर्धन के उपायों पर विस्तृत अध्ययन करेंगे।
सांस्कृतिक गौरव
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सरायकेला छऊ की वर्षों की अटूट साधना, समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा का राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान है। रंजीत कुमार आचार्य लंबे समय से छऊ नृत्य की बारीकियों को संजोने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटे हैं।
आचार्य की भूमिका
संस्कृति मंत्रालय की ओर से दिया जाने वाला यह सीनियर फैलोशिप सम्मान उनकी इसी कलात्मक निष्ठा और विशेषज्ञता पर मुहर लगाता है। चयन से पूरे झारखंड के सांस्कृतिक जगत में खुशी की लहर है। इस बड़ी उपलब्धि पर क्षेत्र के कला प्रेमियों, छऊ कलाकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने आचार्य को बधाई दी है।
वर्तमान कार्य
रंजीत कुमार आचार्य वर्तमान में झारखंड सरकार के पंचायतीराज विभाग में राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा वे छऊ नृत्य विचित्रा संस्था के सह निदेशक सह कोषाध्यक्ष भी हैं। समय-समय पर वे छऊ नृत्य की विविध परंपराओं और उसके विभिन्न आयामों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करते रहे हैं।




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