Signs of a Rebellion within the TMC Mamata Banerjee Party MLAs Vent Their Frustration मुझे चुप रहने बोला, भड़ास निकाल रहे ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक; TMC में बगावत?, India News in Hindi - Hindustan
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मुझे चुप रहने बोला, भड़ास निकाल रहे ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक; TMC में बगावत?

विधानसभा परिसर में बीआर अंबेडकर की मूर्ति के पास आयोजित इस धरने में पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 35 विधायक शामिल हुए। पार्टी का यह प्रदर्शन चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा, लोगों को हटाए जाने के अभियान और बुलडोज़र की कार्रवाई के खिलाफ था।

Thu, 21 May 2026 08:52 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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मुझे चुप रहने बोला, भड़ास निकाल रहे ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक; TMC में बगावत?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस विधायक अब विरोध के सुर अपना रहे हैं। हाल ही में उलुबेरिया पूर्व विधायक रिताब्रता बंदो ने कहा है कि टीएमसी नेतृत्व ने उन्हें भ्रष्टाचार पर बात करने से रोक दिया था। साथ ही उन्होंने चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी I-Pac की तरफ से भी मिल रही सलाहों पर सवाल उठाए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधायक ने कहा, 'मैं 15 दिन का समय लूंगा, लेकिन इस भ्रष्टाचार का बोझ मैं ढोकर नहीं फिरूंगा। उलूबेरिया में आवास में भ्रष्टाचार हुआ है। कई फर्जी घर हैं। जब पार्टी को बताया, तो पार्टी ने चुप रहने के लिए कहा था।' उन्होंने साथ ही 'बेईमान' लोगों के साथ रहने से इनकार कर दिया है।

उन्होंने कहा, 'असत्य/बेईमान लोगों को साथ नहीं रखूंगा। मैं उलूबेरिया नगरपालिका में नहीं बैठूंगा। ईमानदार पार्षदों के टूटे हुए दफ्तर में ही बैठूंगा।' उन्होंने कहा है कि आईपैक की तरफ से भी भ्रष्टाचार को दबाने के लिए कहा गया था। उनका आरोप है कि आईपैक के बड़े-बड़े बाबुओं से बात करने के लिए तीर्थ के लगातार इंतजार में बैठे रहना पड़ता था। उन्होंने ही कहा था चुनाव के समय भ्रष्टाचार को लेकर बात न करने के लिए। बोलने पर मुश्किल होगी। बाद में कहा कि स्थानीय लोगों को लेकर बात करने पर भी उसके ऊपर के स्तर के लोगों को लेकर बात नहीं की जा सकती।’

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नहीं पहुंच रहे विधायक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को अपना पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा परिसर में बीआर अंबेडकर की मूर्ति के पास आयोजित इस धरने में पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 35 विधायक शामिल हुए। पार्टी का यह प्रदर्शन चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा, लोगों को हटाए जाने के अभियान और बुलडोज़र की कार्रवाई के खिलाफ था।

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यह प्रदर्शन अपनी मांग से ज्यादा पार्टी के उन विधायकों के लिए चर्चा में रहा जो इससे गायब रहे। पंद्रह साल बाद सत्ता से बाहर होकर विपक्ष में बैठी तृणमूल कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी और बेचैनी इस धरने में साफ देखने को मिली। प्रदर्शन में शोभनदेव चट्टोपाध्याय, कुणाल घोष, नयना बनर्जी और रिताब्रता बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेता तो मौजूद थे, लेकिन आधे से ज्यादा विधायकों की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में अटकलें तेज कर दी हैं।

यह बात इसलिए भी ज्यादा अहम है क्योंकि एक दिन पहले ही दक्षिण कोलकाता के कालीघाट में पार्टी की एक बड़ी बैठक हुई थी, जिसमें नेताओं ने फिर से सड़कों पर उतरकर राजनीति करने पर जोर दिया था।

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पार्टी का मतभेद से इनकार

विपक्ष के नेता पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार और वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने पार्टी में किसी भी मतभेद से इनकार किया है। उन्होंने विधायकों की कम संख्या पर सफाई देते हुए कहा, 'आज के कार्यक्रम में करीब 35 विधायक मौजूद थे। चूंकि कई विधायक चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित इलाकों में कार्यकर्ताओं के साथ व्यस्त हैं इसलिए वे नहीं आ सके। इसके अलावा यह कार्यक्रम सिर्फ एक दिन के नोटिस पर रखा गया था, जिससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले विधायकों के लिए तुरंत पहुंचना मुश्किल था।'