क्या सुप्रीम कोर्ट ही पूरा देश चलाए? किस बात पर भड़क गए CJI, बोले- यह शॉपिंग मॉल जैसी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सड़कों, पुलों और बिजली के तारों वगैरह के रखरखाव के जरिए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘आप चाहते हैं कि हम पूरे देश को चलाएं।’ मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिका ‘शॉपिंग मॉल’ जैसी है, जिसमें हर तरह के राहत की मांग की गई है जिसमें सड़क के गड्ढों से लेकर पुलिस की इमारतों तक, पुलों और अंडरपास का पूरा न होना, सब कुछ यहां मौजूद है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आप जिस भी राहत का नाम लें, वह यहां नहीं मिलेगी? यहां सब कुछ बताया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश जारी करना लगभग नामुमकिन है जिन्हें पूरी तरह से संभालना मुश्किल हो, जब तक कि उठाए गए मुद्दे खास न हों। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि हम इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हैं। हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता को यह अच्छे तरह से याचिका तैयार कर संबंधित हाईकोर्ट जाने की छूट दी।
मेडिकल साइंस जानने का दिखावा क्यों करें
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि हमें यह दिखावा क्यों करना चाहिए कि हम चिकित्सा विज्ञान जानते हैं। दरअसल, याचिका में प्राप्तकर्ताओं को संक्रमण मुक्त रक्त की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी ब्लड बैंकों में अनिवार्य न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग की मांग की थी।
डाटा संरक्षण कानून संबंधी नई याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही, इस मुद्दे पर पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और कहा कि इस पर पहले से लंबित याचिकाओं के साथ 23 मार्च को सुनवाई की जाएगी।




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