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मायका या ससुराल? शादी के बाद OBC महिला के 'क्रीमी लेयर' का आधार क्या होगा, SC सुलझाएगा पेंच

सुप्रीम कोर्ट इस अहम सवाल पर विचार करेगा कि किसी विवाहित OBC महिला के लिए 'क्रीमी लेयर' का निर्धारण उसके पति की आय से होगा या माता-पिता की आय और पेंशन से। सरकारी नौकरी और आरक्षण से जुड़ी इस बड़ी खबर की पूरी जानकारी पढ़ें।

Sat, 28 Feb 2026 11:11 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मायका या ससुराल? शादी के बाद OBC महिला के 'क्रीमी लेयर' का आधार क्या होगा, SC सुलझाएगा पेंच

सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल की जांच करने के लिए सहमत हो गया है कि सरकारी नौकरी में आरक्षण प्राप्त करने के लिए एक विवाहित ओबीसी (OBC) महिला उम्मीदवार के 'क्रीमी लेयर' में आने का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा- उसके पति की आय पर या उसके माता-पिता की आय पर।

पहले मामला समझिए

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला कर्नाटक की एक महिला का है, जो न्यायिक अधिकारी (सिविल जज) बनना चाहती है। वह हिंदू नामधारी समुदाय से ताल्लुक रखती है, जो कर्नाटक में आरक्षण की II-A श्रेणी के अंतर्गत आता है। अप्रैल 2018 में, महिला की शादी हो गई। महिला का पति आरक्षण की III-B श्रेणी के अंतर्गत आता है। शादी के बाद से महिला अपने माता-पिता से अलग रह रही है।

उसने सिविल जज के पद के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती में कुल 57 में से 6 पद II-A श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। अपने चयन के बाद, उसने अपने पति की आय के आधार पर जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन और 'सिंधुत्व' प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया था।

विवाद का कारण

जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने महिला का आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह अपने माता-पिता की आय के कारण क्रीमी लेयर के दायरे में आती है, जिससे वह आरक्षण के लिए अयोग्य हो जाती है। महिला की मां कर्नाटक न्यायिक सेवा से जिला न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं, जबकि उसके पिता सहायक वन संरक्षक के पद से रिटायर हुए हैं।

कर्नाटक हाई कोर्ट में क्या हुआ?

महिला ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह तर्क दिया कि चूंकि वह शादीशुदा है, इसलिए उसकी पात्रता उसके पति की आय के आधार पर तय होनी चाहिए। उसने दलील दी कि उसके पति की वार्षिक आय उसे क्रीमी लेयर की अयोग्यता से बाहर रखती है।

हालांकि, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया में माता-पिता की पेंशन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सहमति जताते हुए महिला के दावे को खारिज कर दिया और फैसला सुनाया कि माता-पिता की पेंशन को भी परिवार की आय माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में अपील

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ महिला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बुधवार को उनकी अपील पर बहस करते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय एम. नुली ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के सामने कानूनी सवाल उठाए-

क्या एक विवाहित महिला उम्मीदवार की क्रीमी लेयर का निर्धारण करने के लिए पति की आय पर विचार किया जाना चाहिए या माता-पिता की आय पर?

यदि माता-पिता की आय पर विचार किया जाना है, तो क्या माता-पिता की पेंशन को 'आय' के रूप में गिना जाना चाहिए या नहीं?

सुप्रीम कोर्ट का कदम

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस अपील पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद, महिला (अपीलकर्ता) को एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर (rejoinder) दाखिल करने की अनुमति दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है।