बच्चों को कुछ भी पढ़ाना चाहिए क्या, किताब पर पूर्व CJI भी भड़के; NCERT को सुनाया
जब पूर्व सीजेआई सैम पिरोज भरूच के बयाने के बारे में जस्टिस रमणा से पूछा गया, तो उन्होंने इसपर सवाल किए। उन्होंने कहा, 'एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई एक अस्पष्ट टिप्पणी को छात्रों के लिए परम सत्य मानकर पढ़ाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताब में भ्रष्टाचार चैप्टर के मुद्दे पर न्यायपालिका के पूर्व सदस्य भी नाराज नजर आ रहे हैं। अब भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एनवी रमणा ने इसे बकवास बताया है। साथ ही सवाल किए हैं कि किस आधार पर जजों और संस्था को बदनाम किया जा रहा है। बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई थी और स्वत: संज्ञान लिया है। गुरुवार को मामले में सुनवाई होनी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस रमणा ने कहा, 'क्या कोमल बुद्धि वाले छात्रों को गलियारों में होने वाली गपशप के आधार पर कुछ भी पढ़ाया जाना चाहिए? वह क्या आधार है जिसके दम पर NCERT इस संस्था (न्यायपालिका) को बदनाम करने और जजों का मनोबल गिराने की कोशिश कर रहा है?'
जब पूर्व सीजेआई सैम पिरोज भरूच के बयाने के बारे में जस्टिस रमणा से पूछा गया, तो उन्होंने इसपर सवाल किए। उन्होंने कहा, 'एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई एक अस्पष्ट टिप्पणी को छात्रों के लिए परम सत्य मानकर पढ़ाने का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह कतई उचित नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर बिल्कुल सही कदम उठाया है।'
जस्टिस भरूच का बयान
जस्टिस भरूच ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात स्वीकारी थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 22 दिसंबर 2002 में केरल में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था, 'इस देश में हर स्तर पर 80% से अधिक जज ईमानदार और निष्पक्ष हैं। यह वह छोटा सा प्रतिशत है, जो पूरी न्यायपालिका की छवि को खराब करता है और उसे बदनाम करता है।'
सीजेआई सूर्यकांत हुए नाराज
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी द्वारा मामले का, तत्काल विचार करने के लिए उल्लेख किये जाने के बाद, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के बारे में 'आपत्तिजनक' सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया था। आपत्ति जताई और कहा कि धरती पर किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
खबर है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आपत्ति जताए जाने के बाद आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। पीटीआई भाषा के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि पुस्तक में विवादित विषय को शामिल करना सरकार को पसंद नहीं आया है।




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