Shiv Sena UBT leader Sanjay Raut book Unlikely Paradise allege former VP Jagdeep Dhankhar resigned under ED pressure जगदीप धनखड़ ने ED के दबाव में दिया था इस्तीफा, सांसद की किताब में पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर बड़ा दावा, India News in Hindi - Hindustan
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जगदीप धनखड़ ने ED के दबाव में दिया था इस्तीफा, सांसद की किताब में पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर बड़ा दावा

किताब में दावा किया गया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 2025 में अपने पद से इस्तीफा ED के दबाव में दिया था। किताब में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

Tue, 24 March 2026 03:09 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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जगदीप धनखड़ ने ED के दबाव में दिया था इस्तीफा, सांसद की किताब में पूर्व उपराष्ट्रपति को लेकर बड़ा दावा

Jagdeep Dhankar: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपनी नई किताब 'अनलाइकली पैराडाइज' में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लेकर बड़ा दावा किया है। राउत ने दावा किया है कि धनखड़ ने पिछले साल ED के दबाव में इस्तीफा दिया था। धनखड़ ने अपनी इस किताब में अन्य कई विवादित दावे भी किए हैं। बता दें कि यह किताब उन्होंने जेल में रहते हुए लिखी थी। यह किताब 2025 में मराठी भाषा में छपी थी और अब इसके अंग्रेजी अनुवाद का सोमवार को विमोचन हुआ है।

किताब में दावा किया गया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 2025 में ED के दबाव में आकर पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। राउत के मुताबिक धनखड़ पर यह दबाव इसलिए बनाया गया क्योंकि धनखड़ मोदी सरकार के खिलाफ स्वतंत्र राजनीतिक कदम उठा रहे थे। किताब में कहा गया है कि उस समय यह अफवाह भी थी कि धनखड़ और उनकी पत्नी ने जयपुर का अपना घर बेचकर कुछ रकम विदेश भेजी है। इसी आधार पर ED ने उनके खिलाफ अन्य जांच एजेंसियों के साथ मिलकर एक फाइल तैयार की थी।

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ED ने फाइल दिखाकर बनाया दबाव

राउत के अनुसार, जब धनखड़ के स्वतंत्र राजनीतिक कदमों की चर्चा बढ़ी, तो ED ने उन्हें यह फाइल दिखाकर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। दावे के मुताबिक शुरुआत में जगदीप धनखड़ ने इससे इनकार किया, लेकिन इसके बाद जांच का दबाव और बढ़ा दिया गया, जिससे वह असहज नजर आने लगे। गौरतलब है कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए बीते 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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सरकार पर गंभीर आरोप

किताब में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। राउत का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कथित चुनावी उल्लंघनों के खिलाफ अलग राय रखने की वजह से लवासा के घर पर छापा पड़ा और उनके परिवार को ED के समन मिले। किताब के मुताबिक, चुनाव आचार संहिता के आठ उल्लंघनों की शिकायत के आधार पर लवासा ने कार्रवाई शुरू की थी और उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। राउत का आरोप है कि इसके बाद लवासा और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े। किताब में कहा गया है कि 2020 में ED की कार्रवाई ने उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया और उसके बाद भी वह एजेंसी की जांच के दायरे में रहे।

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शरद पवार को लेकर क्या लिखा?

किताब में आगे दावा किया गया है कि उस दौर में यह चर्चा थी कि गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजा जा सकता है। हालांकि, उस समय केंद्रीय मंत्री रहे शरद पवार इस कदम के पक्ष में नहीं थे। किताब के मुताबिक, एक कैबिनेट बैठक में पवार ने कहा था कि किसी चुने हुए मुख्यमंत्री को राजनीतिक मतभेद के आधार पर जेल भेजना सही नहीं होगा। राउत के अनुसार, पवार की यह राय कई नेताओं को सही लगी और इससे पीएम मोदी को भी जेल जाने से बचाया गया। किताब में यह भी दावा किया गया है कि शरद पवार और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे ने अमित शाह को जमानत दिलाने में मदद की थी।