Shia cleric Maulana Syed Kalbe Jawad Naqvi says believers Karbala can not surrender ever जान दे सकते हैं लेकिन सरेंडर नहीं करते, खामेनेई की मौत पर कल्बे जवाद नकवी, India News in Hindi - Hindustan
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जान दे सकते हैं लेकिन सरेंडर नहीं करते, खामेनेई की मौत पर कल्बे जवाद नकवी

दिल्ली में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी इस हालात को नहीं चाहता था। हमारी स्थिति अच्छी नहीं है, अमेरिका ने हम पर हमला किया है।

Sat, 7 March 2026 03:48 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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जान दे सकते हैं लेकिन सरेंडर नहीं करते, खामेनेई की मौत पर कल्बे जवाद नकवी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ईरान के साथ कोई समझौता नहीं' वाले बयान पर शिया धर्मगुरुओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि करबला के विश्वासी कभी सरेंडर नहीं करते, चाहे मौत ही क्यों न आए। उन्होंने ईरान को दुनिया के सामने अकेला खड़ा बताया और कहा कि हम ट्रंप से बात नहीं करना चाहते। ट्रंप ने दावा किया था कि सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लोग सब कुछ हथिया लेंगे, लेकिन क्या ऐसा हुआ? इससे साबित होता है कि सबने खामेनेई का साथ दिया। उन्होंने माफिया के सामने झुकने से इनकार किया और जोर दिया कि ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा।

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मौलाना ने यह भी कहा कि अगर सरकार इजाजत दे तो यहां से हजारों लोग ईरान जाकर लड़ने को तैयार हैं, लेकिन हम कानून का पालन करते हैं और इसे तोड़ना नहीं चाहते। दिल्ली में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी इस हालात को नहीं चाहता था। हमारी स्थिति अच्छी नहीं है, अमेरिका ने हम पर हमला किया है। हमें अपनी गरिमा, नैतिकता और स्वतंत्रता के लिए खुद का बचाव करना पड़ रहा है। उन्होंने बलिदान देने की बात कही और विश्वास जताया कि ईरान का भविष्य बेहतर होगा।

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भारत-ईरान के बीच 3000 साल पुरानी दोस्ती

डॉ. इलाही ने भारत और ईरान के बीच 3000 साल पुरानी दोस्ती और संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह रिश्ता हमेशा बना रहेगा। यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों की खबरें हैं, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत जैसी घटनाएं शामिल बताई जा रही हैं। इन हमलों ने मध्य-पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। शिया समुदाय में गुस्सा और एकजुटता दिख रही है, जहां लोग ईरान के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।

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यह घटनाक्रम भारत-ईरान संबंधों की मजबूती को भी दर्शाता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव गहरा है। वर्तमान संकट के बावजूद, प्रतिनिधियों ने भविष्य में बेहतर संबंधों की उम्मीद जताई है। यह बयान न केवल ईरान के प्रति समर्थन दर्शाते हैं, बल्कि अमेरिकी नीतियों के खिलाफ भी मजबूत रुख दिखाते हैं।

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