IRIS Dena के डूबने पर पहली बार बोले जयशंकर, कहा- हिंद महासागर की वास्तविकता समझना जरूरी
IRIS Dena डूबने को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हमें हिंद महासागर की वास्तवकिता को समझना होगा। यहां पर डिएगो गार्सिया और जीबूती जैसे सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ईरान के एक जहाज को कोच्चि में ठहरने की अनुमति को लेकर उन्होंने कहा कि हमने मानवीय आधार पर किया है।

ईरान और अमेरिका-इजरायल के युद्ध ने पूरी दुनिया को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। भारत की समुद्री सीमा से कुछ मील दूर हिंद महासागर में ईरानी जहाज IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था। वर्तमान में एक और ईरानी जहाज IRIS Lavan इस समय कोच्चि में खड़ा हुआ है। इस बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य पर अब विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ईरानी जहाज IRIS Lavan को मानवीय आधार पर कोच्चि में रुकने की अनुमति दी गई है। वहीं, IRIS Dena के डूबने पर उन्होंने कहा कि हमें हिंद महासागर की वास्तविकता को समझना चाहिए।
रायसीना डायलॉग्स में कोच्चि में ठहरे ईरानी जहाज को लेकर अपनी बात को रखते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "मैं भी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का सम्मान करता हूं। हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि उनका एक जहाज, जो उस समय हमारी सीमा के सबसे करीब था, हमारे बंदरगाह में आना चाहता है क्योंकि उसमें समस्या आ गई थी। मुझे याद है कि यह 28 तारीख को हुआ था और 1 मार्च को हमने कहा कि ठीक है, आप आ सकते हैं। उन्हें यहाँ आने में कुछ दिन लगे और फिर उन्होंने कोच्चि में जहाज खड़ा किया। जहाज के कई लोग युवा कैडेट थे। वे अब जहाज से उतर चुके हैं और पास की सुविधा में रह रहे हैं। जब वे यहाँ आने के लिए निकले थे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी।”
उन्होंने आगे कहा, "वे यहाँ फ्लीट रिव्यू में भाग लेने आ रहे थे, लेकिन घटनाओं के कारण गलत समय में फँस गए। ऐसे में जब जहाज ने मदद माँगी और वह भी कठिनाई में था, तो हमारे लिए मानवीय दृष्टिकोण से मदद करना सही था। इसलिए हमने यही फैसला लिया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।”
IRIS Dena पर क्या बोले?
विदेश मंत्री जयशंकर से जब इस बारे में सवाल किया गया कि हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को डुबो दिया, तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमें हिंद महासागर की वास्तवकिता को समझना होगा। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर को आप सिर्फ क्षेत्र के देशों के हिसाब से नहीं समझ सकते। डिएगो गार्सिया (ब्रिटिश सैन्य ठिकाना) यहां पर करीब 50 वर्षों से मौजूद है। जिबूती में विदेशी ठिकाने 2000 के शुरुआती वर्षों में बन गए थे। हंबनटोटा पोर्ट भी इसी दौर में विकसित हुआ था।
विदेश मंत्री ने कहा कि हमारा काम भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ध्यान देना है। उन्होंने कहा, "भारत के 90 लाख से 1 करोड़ लोग खाडी देशों में रहते हैं, दुनिया भर के जहाजों में हमारे लोग काम करते हैं, किसी भी जहाज पर हमला होता है, उसमें कोई न कोई क्रू सदस्य भारतीय होता है। हाल के दिनों में कुछ भारतीय नाविकों की मौत भी हो गई है। इन सभी की सुरक्षा करना भारत की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गौरतलब है कि विशाखापट्टनम में आयोजित फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आए ईरानी जहाज आईआरआईएस डेना को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के जल क्षेत्र से दूर टॉरपीडो से हमला करके डुबा दिया था। इस हमले में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई थी। ईरानी विदेश मंत्री की तरफ से कहा गया कि डेना भारत का मेहमान था और अमेरिका ने जब उस पर हमला किया, तब वह निहत्था था। भारत में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त सवाल उठाए थे। सरकार का समर्थन करने वाले कुछ लोग भी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ खड़े दिखाई दिए थे।




साइन इन