मुझे महिला विरोधी नहीं मानते, शशि थरूर ने बताया किरेन रिजिजू से क्या हुई थी बात
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के साथ हुई बातचीत का अंश साझा किया। दोनों के बीच यह बातचीत लोकसभा की कार्रवाई स्थगित होने के बाद हुई थी।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के साथ हुई बातचीत का अंश साझा किया। दोनों के बीच यह बातचीत लोकसभा की कार्रवाई स्थगित होने के बाद हुई थी। थरूर ने कहाकि भाजपा नेता ने स्वीकार किया कि कोई भी मुझे कभी महिला-विरोधी नहीं कह सकता। उन्होंने कहाकि महिलाएं निश्चित तौर पर मानव प्रजाति का सबसे बेहतर रूप हैं। इन्हें संसद और सभी अन्य संस्थाओं में प्रतिनिधित्व पाने का अधिकार है। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने एक्सपर कहाकि बस उनकी उन्नति को किसी शरारती और संभावित रूप से खतरनाक सीमा निर्धारण से जोड़कर मत देखो जो हमारे लोकतंत्र को तबाह कर सकता है।
साझा की है तस्वीर
लोकसभा में रिजिजू के साथ खड़े कुछ विपक्षी सांसदों की तस्वीर साझा करते हुए, थरूर ने लिखा कि संसद स्थगित होने के बाद लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री के साथ विपक्षी सांसदों की बैठक। उन्होंने आगे लिखा कि इस दौरान रिजिजू ने बताया कि वह और उनकी पार्टी विपक्ष को महिला विरोधी क्यों कह रहे हैं। थरूर के मुताबिक हालांकि उन्होंने यह भी कहाकि कोई भी मुझे कभी महिला विरोधी नहीं कह सकता।
बताया कि बिल पर विरोध क्यों
एक अन्य बयान में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहाकि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति है। उन्होंने कहाकि हम महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करते हैं और शुक्रवार को ही विधेयक पारित करा देते। हमारी आपत्ति आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर थी। थरूर ने कहाकि परिसीमन से देश के भविष्य से जुड़े मौलिक सवाल खड़े होते हैं और इसे जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहाकि यह महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक खेल था। महिलाओं का इस्तेमाल अल्पकालिक राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा था। अगर सरकार मॉनसून सत्र में नया विधेयक लाती है और इसे परिसीमन से नहीं जोड़ती, तो हम उसे पारित करा देंगे।
लोकसभा में क्या हुआ था
बता दें कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सदन में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।




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