ये शर्मनाक है कि… ईरान जंग को लेकर भारत सरकार के रुख की तारीफ करने वाले शशि थरूर अब क्यों बिगड़े?
शशि थरूर ने कहा कि वह लगातार इस बात की वकालत कर रहे थे कि भारत को अपने कूटनीतिक संबंधों का लाभ उठाकर संबंधित पक्षों के बीच बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में प्रस्तावित बातचीत पर नाराजगी जताई।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता की खबरों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नाराजगी जताई है। थरूर ने कहा है कि इस मौके पर भारत को शांति स्थापित करने में आगे रहना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। बता दें कि शशि थरूर उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिनमें यह बात सामने आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत कराने में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश अगुवाई कर रहे हैं।
शशि थरूर ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि उन्होंने इस पूरे मुद्दे पर सरकार के संयमित रुख का समर्थन किया था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भारत इस मौके का इस्तेमाल शांति प्रयासों में नेतृत्व करने के लिए करेगा। उन्होंने कहा, “अभी के हालात अच्छे नहीं लग रहे हैं। यह हम सभी के लिए थोड़ा शर्मनाक है।” थरूर ने आगे कहा, “विडंबना यह है कि आज पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर मध्यस्थता की अगुवाई कर रहा है। इससे मैं खुश नहीं हूं।”
भारत क्यों पीछे?- शशि थरूर
कांग्रेस सांसद ने बताया कि वह लगातार यह कहते रहे हैं कि भारत को अपने कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू करवानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता हो रही है, तो उसमें भारत की कोई भूमिका नहीं है। मैं करीब तीन हफ्तों से कह रहा हूं कि भारत को आगे बढ़कर अपनी अच्छी कूटनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करना चाहिए था।”
पहले दिए गए बयान पर भी बोले
इस दौरान शशि थरूर ने यह भी कहा कि युद्ध को लेकर उनके पहले दिए गए बयान का मतलब बीजेपी सरकार का समर्थन करना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी और खासकर सांप्रदायिक राजनीति के आलोचक हैं, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर वह राष्ट्रीय हित की बात करते हैं।
पाकिस्तान को चौधरी बनने की खुजली
बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में पाकिस्तान को चौधरी बनने की पड़ी है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के 'व्यापक समाधान' के लिए वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीते दिनों एक बयान में इसकी पुष्टि की थी।
ईरान ने खारिज किया प्रस्ताव
हालांकि ईरान ने बुधवार को पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले युद्धविराम के अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। साथ ही उसने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले भी तेज कर दिए। ईरान के सरकारी समाचार प्रसारक 'प्रेस टीवी' ने एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि ईरान ने युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। प्रेस टीवी ने अधिकारी के हवाले से बताया, "ईरान युद्ध तभी समाप्त करेगा जब वह ऐसा चाहेगा और जब उसकी शर्तें पूरी होंगी।" अधिकारी ने यह भी कहा कि तेहरान पश्चिम एशिया में अपने 'जोरदार हमले' जारी रखेगा।





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