भारत का होर्मुज खुलवाने जाना मतलब युद्ध का ऐलान, ईरान मामले पर शशि थरूर ने चेताया
तनाव बढ़ने के बाद 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के बंद होने से भारत की लगभग 60 प्रतिशत गैस आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे व्यावसायिक आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी और घरेलू उपभोक्ताओं में घबराहट के कारण भारी बुकिंग शुरू हो गई।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कार्रवाई के लिए देशों से अपील कर रहे हैं। हालांकि, कोई भी देश खुलकर इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जता पाया है। अब भारतीय सांसद और पूर्व विदेश मंत्री शशि थरूर ने कहा है कि अगर भारत होर्मुज खुलवाने जाता है, तो यह एक्ट ऑफ वॉर होगा। हालांकि, ट्रंप ने कुछ देशों नाम लिया था, जिसमें भारत शामिल नहीं था।
थरूर से सवाल किया गया, 'क्या ईरानी आक्रमण के खिलाफ भारत को ट्रंप के आह्वान पर होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए जाना चाहिए।' इधर, भारत लगातार बातचीत के जरिए तनाव कम करने की वकालत कर रहा है।
तिरुवनंतपुरम सांसद ने जवाब दिया, 'वो एक्ट ऑफ वॉर होगा। भारत की ईरान के साथ युद्ध में कोई दिलचस्पी नहीं है। यही वजह है कि किसी भी देश ने ट्रंप के कॉल का जवाब नहीं दिया है।' खास बात है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए बेहद अहम है। यहां ईरान की तरफ से लगाई गई रोक के चलते भारत में LPG सप्लाई में परेशानी हो रही है।
भारत पर क्या असर पड़ा
ईरान पर 28 फरवरी को हुए सैन्य हमलों से पहले देश के 33 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ता औसतन प्रतिदिन लगभग 55 लाख सिलेंडर बुक कर रहे थे। तनाव बढ़ने के बाद 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के बंद होने से भारत की लगभग 60 प्रतिशत गैस आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे व्यावसायिक आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी और घरेलू उपभोक्ताओं में घबराहट के कारण भारी बुकिंग शुरू हो गई।
हालांकि, सरकार ने कहा है कि एलपीजी के भरे हुए सिलेंडर की बुकिंग युद्ध-पूर्व के सामान्य स्तर के करीब पहुंच रही है, जो स्थिति में धीरे-धीरे सुधार का संकेत है। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे माल की आपूर्ति में जारी व्यवधानों के चलते होटल सहित व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर आपूर्ति प्रतिबंध अब भी लागू हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि 13 मार्च को घबराहट में की गई बुकिंग का आंकड़ा 87.7 लाख के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, जो 18 मार्च को घटकर 56-57 लाख पर आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस आपूर्ति की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन किसी भी वितरक के पास भंडार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि, व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकता का केवल पांचवां हिस्सा (20 प्रतिशत) ही मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो सप्ताह में घरेलू गैस उत्पादन में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
ट्रंप का कोई देश नहीं दे रहा साथ
ट्रंप ने होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित करने के प्रस्तावित मिशन के समर्थन से इनकार करने पर नाटो सहयोगियों की कड़ी आलोचना की थी। 17 मार्च को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर बात करते हुए, एक लंबे पोस्ट में अपने सहयोगियों के साथ अपनी निराशा साफ की, यह देखते हुए कि ज्यादातर नाटो देशों ने यह साफ कर दिया था कि वे जलमार्ग के जरिए जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाली कोशिश में शामिल नहीं होना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि वह 'हैरान नहीं हैं' और गठबंधन को 'वन-वे स्ट्रीट' बताया।
उन्होंने लिखा, 'हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है,' साथ ही यह भी तर्क दिया कि सहयोगियों को इसमें हिस्सा लेना चाहिए था। होर्मुज जलमार्ग के आस-पास का यह विवाद, वॉशिंगटन और उसके साथियों के बीच ट्रांसअटलांटिक मतभेदों को और बढ़ाता है, क्योंकि ट्रंप ने लगातार यह तर्क दिया है कि खाड़ी के तेल पर निर्भर देशों - खासकर यूरोप और एशिया में को इस रास्ते को सुरक्षित करने की ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए, यहां तक कि यह भी कहा कि हिचकिचाहट नाटो के अंदर बड़े सहयोग पर असर डाल सकती है।




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